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विवेक जागा तो बन सकते है विवेकानंद _स्वामी से क्या सीखे छात्र

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आज स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिवस को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाया तथा इस अवसर पर विचार गोष्ठियां , भाषण तथा पुष्पांजलि आदि कार्यक्रम आयोजित किए । दिल्ली विश्वविद्यालय की आर्टस् फैकल्टी , मुखर्जी नगर , शहीद भगत सिंह कॉलेज , जेएनयू आदि स्थानों पर अभाविप ने विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया ।

अंकित तिवारी

आगामी सप्ताह भर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दिल्ली के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर विभिन्न विचार संगोष्ठियां , पुष्पांजलि कार्यक्रम , पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता , क्रिकेट टूर्नामेंट आदि का आयोजन करेगी ।

मुखर्जीनगर में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर ‘नागरिकता संशोधन कानून : यथार्थ एवं भ्रांतियां’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में प्रतियोगी छात्रों को संबोधित करते हुए अभाविप के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री प्रफुल्ल आकांत ने कहा कि , ” वर्तमान दौर में छात्रों के समक्ष अनेक चुनौतियां हैं , उन्हें चुनौतियों पर विजय पाते हुए अपने लक्ष्य तक का सफर पूरा करना है । आज कुछ शैक्षणिक संस्थानों में कुछ ऐसी ताकतें हैं , जो छात्रों को अपने राजनीतिक हथियार के रूप में प्रयोग करना चाहती हैं उन्हें ऐसे लोगों से बचने की जरूरत है , जो उनके कैरियर को नुकसान पहुंचाए । छात्रों को हर महत्वपूर्ण चीजों के विभिन्न पहलुओं को समझते हुए एक सकारात्मक निष्कर्ष तक पहुंचने की आवश्यकता है ।

डीयू के शहीद भगत सिंह कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते हुए अभाविप के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री श्रीनिवास ने कहा कि , ” विवेकानंद के विचारों को आज आधुनिक परिप्रेक्ष्य में समझने की आवश्यकता लगातार बढ़ती जा रही है , उन्होंने भारतीय विचार पर गंभीरता से मनन किया और भारत की समस्याओं का समाधान भारत के भीतर ही खोजा । उन्होंने आधुनिक भारत की बुनियाद रखने में जो योगदान दिया था , वह महत्वपूर्ण है । “

डीयू नॉर्थ कैंपस की आर्टस् फैकल्टी पर आयोजित कार्यक्रम में अभाविप दिल्ली के प्रदेश मंत्री सिद्धार्थ यादव ने कहा कि ,” विवेकानंद जी ने विश्व में भारत के विचारों का जो परचम लहराया , उससे भारत को देखने का जो पश्चिम का नजरिया था , उसमें सकारात्मक बदलाव आया । स्वामी विवेकानंद आधुनिक भारत के कुछ प्रारंभिक महत्वपूर्ण चिंतकों में से एक हैं , भारतीय युवाओं को सही दिशा दिखाने में हमेशा उनके विचार प्रासंगिक रहेंगे । “

जेएनयू में पुष्पांजलि कार्यक्रम में अभाविप जेएनयू इकाई के अध्यक्ष दुर्गेश कुमार ने कहा कि , ” आज शैक्षिक परिसरों में संवाद की महत्ता तथा असहमति के अधिकार को सुरक्षित रखने की आवश्यकता है , साथ ही यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हमारे शैक्षणिक संस्थान केवल राजनीति का अड्डा भर न‌ रह जाएं । जेएनयू में विवेकानंद के विचारों की सबसे ज्यादा आवश्यकता है , यहां जिस तरह से वैचारिक अधिनायकवाद अपना क्रूर रूप दिखा रहा है , उसे खत्म करने की आवश्यकता है । “




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