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मंत्री के इंतजार में बड़बड़ाती स्ट्रीट लाइट

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रात के अंधेरे में केंद्रीय मंत्री गडकरी को पुकारती स्ट्रीट लाइट।
गिरीश गैरोला।
गंगोत्री राजमार्ग पर भटवाड़ी से कुछ आगे इस वीरान में रात के अंधरे में सूर्य की तरह प्रकाशमान ये स्ट्रीट लाइट आज भी,  बंद हो चुकी  लोहारीनाग पाला परियोजना की  इस आधी अधूरी सुरंग की देखभाल कर उसे मंत्री के भरोसे की याद दिला रही है जो नितिन गड़करी ने विधान सभा चुनाव में गंगोत्री वासियो से किया था।
इस वीराने में ये स्ट्रीट लाइट केंद्रीय मंत्री  नितिन गडकरी के उस भरोसे की उम्मीद में आज भी जल रही है जो उन्होंने विधान सभा चुनाव 2017 में गंगोत्री में अपने चुनावी भाषण में दिया था।
दरअसल उत्तरकाशी में 600 मेगावाट की लोहारीनाग पाला परियोजना तो बंद हो गयी किन्तु वीरान हो चुके इस इलाके को अभी भी ये स्ट्रीट लाइट रात के घुप्प अंधकार में प्रकाशमान किये हुए है, बीरबल की खिचड़ी ही सही पर इसी की जलती लॉ से बीजेपी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को हल्की उम्मीद है कि शायद कभी वो वचन सच हो जाय । रामलीला मैदान में बीजेपी के जीतने पर स्थानीय विधायक को दिल्ली बुलाकर सपने को सच करते हुए परियोजना को फिर से सुरु करने की बात  केंद्रीय मंत्री द्वारा कही थी साथ मे पत्रकारों की तरफ इशारा  करते हुए कहा था कि उनके इतने लंबे राजनैतिक जीवन मे कभी किसी पत्रकार ने उनकी निष्ठा पर सवाल नही उठा सका क्योंकि वे जो बोलते है उसे पूरा करतें है। अब लोक सभा चुनाव के त्योहार का  मौसम  तो आ ही गया है, अब वादा  पूरा न हुआ तो फिर कब होगा । राजनीति के अच्छे स्वास्थ्य के लिए मौसमी फल समय पर ही लिए जाने चाहिए । गडकरी जी पत्रकार तो अब  सवाल उठा ही रहे है विपक्ष के साथ अब तो खुद की पार्टी के लोग भी दबी जुबान में खुसर फुसर करने लगे है।
कांग्रेश से विधासभा  के महाभारत युद्ध से पहले पाला बदलने वाले विजय बहुगुणा भी अपनी जुबान पर कायम नही रह सके , रहते भी कैसे जब खुद बहु गुणों के धनी विजय भी बीजेपी में सामिल होकर खुद पराजित सा महसूस करने लगे।
पूर्व में टिहरी लोकसभा से  सांसद और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद पर रह चुके विजय बहुगुणा ने भी गंगोत्री विधान सभा मे भरी जनसभा में घोषणा की थी ,  कि सूबे में बीजेपी सरकार बनते ही सबसे पहले मुख्य मंत्री को लेकर जनता के बीच आएंगे विश्वनाथ मंदिर दर्शन के बाद लोहारीनाग पाला परियोजना को छोटा करते हुए फिर से आरंभ करने की घोषणा की जाएगी।
मुख्यमंत्री तो आये फिर विजय को साथ नही लाये, । उत्तराखंड में सरकार बनाने वाली गंगोत्री विधान सभा से किये गए वादे पूर्ण होते इससे पूर्व विजय  से किये गए राजनैतिक वादे को ही ग्रहण लग गया और गंगोत्री एज बार फिर से नेपथ्य में चली गयी।
अब राजधानी देहरादून में बस चुके पहाड़ वासियो के भरोसे चुनाव जीतने का दम भरने वालों को सोचने की जरूरत है कि गंगा गंगोत्री से ही निकल रही है और अंत समय के लिए शुद्ध गंगाजल तो गंगोत्री से ही मिल सकेगा। इतना ही नही दुनिया भर के रजवाड़ो के बीच टिहरी की शान जिस गंगा ने चंडी घाट में आपके टेंट के पास आकर बढ़ाई,  जिस गंगा ने  आपको बड़े रजवाड़ो के बीच  और बड़ा साबित किया वो गंगा गंगोत्री से ही निकलती है उसकी ऐसी उपेक्षा उचित नही।



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