जिस थाने का दूर से देख कर ही डर के मारे सोशल डिस्टेंस अपने आप पैदा हो जाती थी उसी थाने की टेबल पर बैठकर मजदूरों को पुलिसकर्मियों ने खाना खिलाया तो मजदूर सोचने को मजबूर हो गया — शायद अच्छे दिन आ गए।
लॉक डाउन 2 , दिन भर चटक धूप में हड्डियां तोड़ने वाले मजदूर किसानों को खाली पेट बंद कमरों पर रुकना मुश्किल हो रहा है । जब सब तरफ से उम्मीदें टूट गई तो पैदल ही जंगल के रास्ते घर गांव की तरफ निकल लिए बगैर इस बात की चिंता किये कि खाली पेट कब तक और कहां तक पहुंच पाएंगे । जब पेट खाली हो और आगे उम्मीद कोई उम्मीद की किरण न दिखाई दे तो इंसान बे मकसद किसी भी दिशा में बढ़ता चला जाता है।
गिरीश गैरोला
भले ही सरकार ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि किसी भी हाल में मजदूरों को भूखा न रखा जाए साथ ही ठेकेदारों को लॉक
डाउन के दिनों उनकी खाने पीने की व्यवस्था करने की फरमान जारी किया था किंतु ऐसा होता नहीं दिखाई दे रहा है। बड़कोट पुलिस ने परिस्थिति को समझते हुए न सिर्फ मजदूरों को थाने में भोजन कराया बल्कि डॉक्टरी उपचार के बाद उन्हें भरोसा दिलाया किला उनकी अवधि तक उन्हें खाली पेट नहीं रहना होगा।
यदि मजदूरों के इस तरह से भागने की गति को रोका नहीं गया तो आने वाले समय में लॉक डाउन के दौरान खोले गए आवश्यक निर्माण कार्य को करने के लिए जिला प्रशासन के पास लेबर का टोटा हो जाएगा क्योंकि बाहरी जिलों से आने-जाने पर प्रतिबंध है और जिले में पहले से रह रहे मजदूर खाली पेट भागने को मजबूर हो रहे हैं।
बडकोट में स्थानीय जनता के द्वारा बडकोट पुलिस को सूचना दी गई तो बडकोट पुलिस द्वारा उक्त 06 मजदूरों को वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के मध्यनजर सुरक्षा के दृष्टिगत और लॉकडाउन की स्थिति से अवगत कराते हुये अभी यहीं रुकने की हिदायत दी तथा मानवता का परीचय देते हुये बडकोट थाने पर उनके लिए भोजन की व्यवस्था की गई। बडकोट पुलिस द्वारा सभी को थाने पर लाकर उनका थर्मल स्कैनर से प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण कर सभी को थाने पर भोजन करवाया गया। इसके बाद उक्त मजदूरों को विस्तृत मेडिकल परीक्षण हेतु सी0एच0सी0 बडकोट ले जाया गया।
लॉकडाउन के दौरान उक्त मजदूरों के ठेकेदार के द्वारा उनको भोजन आदि की व्यवस्था न करने के परिपेक्ष्य में थाना बडकोट पर ठेकेदार के विरुध्द अभियोग पंजीकृत किया गया।
