पिथौरागढ़।
इंसान और जानवरों कब बीच संघर्ष में आखिर शारीरिक बल पर तेज दिमाग की जीत हुई । जानवरो के शिकार करने में असमर्थ गुलदार ने जब इंसानी बस्ती का रुख किया तो उसे इसका अंजाम अपनी मौत से भुगतना पड़ा।

आतंक का पर्याय बने आदमखोर गुलदार आखिर 32 दिन बाद शिकारी जाँय हुकिल के हत्थे चढ़ ही गया।विगत 25 दिन से शिकारी गुलदार के बीच आंख मिचौली चल रही थी 25 दिन मे एक बार शिकारी जाँय हुकिल को नजर आने के बाद गुलदार लोगों को दिख रहा था पर शिकारी को नहीं।

बीती रात एक बजे पपदेव गांव मे आदमखोर गुलदार का शिकारी से सामना हुआ शिकारी जाँय हुकिल की एक गोली ने गुलदार को ढेर कर दिया।
रेजर ने बताया कि 32 दिनों से जिस आदमखोर गुलदार को तलाश रहै थे वो कल रात एक बजे पपदेव गांव की घनी आबादी मे आया । जिसे शिकारी ने गोली मारकर ढेर कर गुलदार की दहशत खत्म कर दी।उन्होंने बताया कि गुलदार 6से 7 वर्ष करीब का है।उसके नाखून घिसने से वो नरभक्षी बन गया जंगली शिकार न कर पाने की वजह से वो आसान शिकार की तलाश मे मानव बस्ती मे शिकार कर रहा था।
