पश्चिम बंगाल में बीजेपी की रैली के दौरान हुई तोड़फोड़ को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपना पक्ष रखा है साथी इस मामले में राजनीति की घटिया स्तर पर उतरने के लिए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग की है।
अंकित तिवारी
गत 14/05/2019 तारीख एक राजनीतिक दल के रैली को केंद्र करके विद्यासागर कॉलेज में टीएमसी के पाले गए बाहर के गुंडे द्वारा विद्यासागर जी कीे मूर्ति को तोड़ने की घटना सामने आई है यह घटना पूरे बंगाली जाती एवं भारतवासियो के लिए लज्जित घटना है ,राजनीति हिंसा के शिकार हुए विद्यासागर जी की मूर्ति तोड़ने के पश्चात हमारे लोग सामने आए है।घटना के बाद मुख्यमंत्री ने जिन लोगो के साथ पत्रकार संवाद किया उनका उस कॉलेज के साथ दूर दूर तक कोई संपर्क नही था,
अभिषेक मित्रा के नाम बार-बार सामने आ रहा उनके ऊपर पहले से कॉलेज में भर्ती करने में घूस लेने और महिलाओं से छेड़छाड़ का आरोप है।अगर हम देखे विगत 70 वर्षों में मूर्ति तोड़ने की कर्मसूची नक्सलियों ने किया था अब उसी धारा में टीएमसी अपने राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि के लिए बचाये रखा है। पश्चिम बंगाल की यह घटना महापुरुषो की मूर्ति तोड़ने को लेकर एक खराब छवि सारे भारतवर्ष में दिखाया जा रहा है, जिससे राज्य का सम्मान निम्न स्तर पर जा रहा है इसके बाद भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस घटना को दुःखपूर्ण घटना एवं इस दिन को पश्चिम बंगाल के इतिहास में एक काला दिन के हिसाब से मानती है। दोषियो को अभिलंब दंड हो उसके लिए राज्य भर में आंदोलन में भी उतरी है,
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने छात्र समाज,युवा समाज, बुद्धिजीवी वर्ग, एवं सभी स्तर के लोगो को एक कर जनआंदोलन आह्वाहन किया हैं।
पश्चिम बंगाल के छात्र समाज एवं सभी स्तर के लोग अब राजनीतिक दल के दबाब में काम कर रही पुलिस पर विश्वास नहीं कर रहे। पश्चिम बंगाल की पुलिस टीएमसी के B टीम के हिसाब से काम कर रही है। इसीलिए ABVP पश्चिम बंगाल शाखा दावा कर रही है कि वर्तमान कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में निष्पक्ष जाँच हो। पुलिस विद्यार्थी परिषद के निर्दोष कार्यकर्ताओं को बिना किसी कारण सिर्फ मात्र शासक दल के निर्देश पर गैरजमानती धारा लगा कर गिरफ्तार किया गया उनको मुक्त कर दोषियो को गिरफ्तार कर उपयुक्त दंड दिया जाये।


