कब्र पर जश्न का विरोध।

Share Now

जन्मदिन नहीं, धिक्कार दिवस

नर्मदा घाटी में आज का दिन, किसी मंत्री या प्रधानमंत्री का जन्मदिन नहीं, धिक्कार दिवस है। घाटी के गांवों की कब्र पर महल बनाना चाहने वालों को “सबका साथ, सबका विकास” का नारा नहीं देना चाहिए। उनका संकल्प पत्र पानी भरने का , कंपनियों को बख्शने का है। विस्थापितों को क्या, गुजरात के किसान और सूखाग्रस्तों को सही लाभ नहीं दे रहे हैं।

अंकित तिवारी

मध्य प्रदेश के मैदानी गांवों में सर्वेक्षण और बैकवाटर लेवल का खेल, आंकड़ों और पैसों का बड़ा घोटाला, संवादहीनता के साथ-2 भ्रष्टाचार किया और पुनर्वास पूरा होने के झूठे दावे किए। आज की काँग्रेस सरकार संवाद कर रही है, गुजरात और केंद्र के सामने सवाल उठा रही है। लेकिन हजारों परिवारों का पुनर्वास बांकी है। युद्ध स्तर पर कार्य होना जरूरी था, जरूरी है।


आज चिखलदा, खापरखेड़ा, जांगरवा, सेगांवा, निसरपुर जैसे गांवों की हत्या हो चुकी है ।भूर्जन के बिना कई घर, गांव, खेती डूब रही है या टापू बनी है। यह विनाश क्या जश्न मनाने लायक है? नर्मदा के किनारे ध्वस्त हैं। मंदिर ,मस्जिद बिना पुनर्वास के डूबे हैं। मोदी जी और रूपानी जी के “नमामि देवी नर्मदे” कहते हुए झूठे दावों को, विकृत नजरिये को नर्मदा बचाने का संकल्प लेकर 34 सालों से लड़ते आये किसान, मजदूर, मछुआरे, केवट, आदिवासी-दलित विकास की दिशा और अवधारणा पर चुनौती दे रहे हैं।
बड़वानी में बड़ा प्रदर्शन तथा अलीराजपुर और महाराष्ट्र के नंदुरबार में आदिवासियों की संघर्ष रैली हो रही है।

आज दोपहर 12 बजे शहीद स्तंभ पर सेकड़ों महिलाए और पुरुष एकत्रित होकर नर्मदा घाटी के विनाश के खिलाफ और जन्मदिन का जश्न मनाकर सरदार की वाहवाह करने वाले मोदी और गुजरात शासको के खिलाफ लोगों ने आवाज उठायी |
शहीद स्तंभ पर फुल हार चढाते चढाते उन्होंने नर्मदा घाटी जल, जंगल, जमीन और आजादी का भी शहादत दे रहे हैं विकास के नाम पर यह बात वही एक चिट्ठी चिपकाकर जाहिर कर दी भीमानायक से लेकर जो जो शहीदों के नाम रहे हैं इस क्षेत्र के उसके आगे नर्मदा घाटी का नाम भी क्या अब शहीदों में जोड़ा जाये यह सवाल था नर्मदा घाटी के लोगों का |


नर्मदा घाटी के सभी लोग उसके बाद वाहन रैली निकालकर पुरे बडवानी में चपे चपे पर गली गली में घूमें और उन्होंने बडवानी को एक प्रकार से जाहिर किया कि आज के जन्मदिन के जश्न की वो खिलाफत करते है क्यों की यह कब्र पर महल बनाने जैसी बात है बडवानी की रैली एक बाजु और धार जिले के निसरपुर से लेकर एकलबारा तक के और नावड़ाटोड़ी तक के गांवो के लोग जो अपने अपने वाहनों में गणपुर चोकडी में पधारे थे वहां सरदार पटेल के ही पुतले को हार चढाते हुए उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का जो व्यक्तिमत्व रहा वह किसानों के लिए न्याय दिलाने वाला और गांधीजी के साथ आजादी आंदोलन में जुड़कर आजादी के बाद भी विविध स्थानों को भारत में सम्मिलित करने का बड़ा काम किया उन्होंने सम्प्रदायिकता को माना नहीं और सम्प्रदायी संस्थाओं को बहिस्कार की बात खुले आम की थी लेकिन आज यह निश्चित दिखाई दे रहा की उनके विचार महात्मा गांधी के विचार और बाबा साहेब ने दिया संविधान सबका उल्लंघन हो रहा है विकास के नाम पर विकास की परियोजनाओं पर भी |

बडवानी और गणपुर चोकडी से आयी हुई रैलीया नर्मदा जो की आज उफान पर है और अंतिम जलस्तर पर पहुँच ही गईं है और उसी पर बने कसरावद पुल पर आकर थम गई यहाँ कुछ हजार भाई बहन ने अपना डेरा करीबन तीन घंटों के लिए डाला उन तीन घंटों में हमारे समर्थक साथी आये थे उनके अलावा विविध सम्प्रदाय और समुदायों के कहारों के, केवटों के, मछीमारों के, धनगर समाज के लोग जो मवेशी बड़े पैमाने पर रख रहे है और मजदुर, किसान सभी के अपने अपने व्यक्तव्य हुए रणवीर तोमर से लेकर देवराम कनेरा तक के किसानों ने बात रखी , श्यामा मछुआरा ने बात रखी, सनोबर मंसूरी एक महिला किसान है उन्हें अपना घर और खेती मिल गई है लेकिन उन्हें अपनी दुकान की गिनती नहीं हुई है , मछुआरों को जलाश्रय पर अधिकार नहीं मिला है इस स्थिति में बिना सम्पूर्ण पुनर्वास के डूब लाने के की एक तरह से साजिस का एक तरह से धिक्कार कर दिया |
बाहर से आये हुए समर्थकों में बिहार के महेंद्र यादव थे को कोशी के क्षेत्र में बांध से आयी हुई बाढ़ को भुगतने वालों के साथ सैलून से सक्रिय है , केरल से आये हुए जेकब थे जो निसर्ग उपचार, प्राक्रतिक उपचार और जैविक खेती को आगे बढ़ाने वालों में से है और जेकब भाई ने भी केरल की बाढ़ को शासन निर्मित बाढ़ बताते हुए नर्मदा से जोड़ लिया हमारे साथ जाग्रत दलित आदिवासी संगठन के माधुरी बहन, हरेसिंह भाई, नाचरी बहन यह भी आये थे माधुरी बहन ने इस देश के हालत जनतंत्र विरोधी हो रहे है और आदिवासीयों के संसाधनों की लुट चल रही है इस पर जोर देते हुए कहा नर्मदा आंदोलन इसी मुद्दे को उठाये आज जो गुजरात और केंद्र सरकार कर रही है वह अमानवीय है | साथीयों आज के कार्यक्रम का दूसरा हिस्सा था मुंडन करना घाटी को हिंसा के द्वारा मौत के कगार पर ढकेलने वालो को एक प्रकार से जवाब था जांगरवाके कुंवरसिंह भाई, एकलबारा के राधेश्याम भाई और खापरखेडा के देवराम भाई ने अपना मुंडन प्रतिनिधियों के रूप में करवाते हुए कहा की हमारे लिए तो सरकार मर चुकी है और इसीलिए हम लोग यह करने जा रहे है उसके बाद गीतों और नारों के साथ लोगों के बीच में जो माहौल बना हुआ था उस माहौल में एक अंतिम कार्यक्रम रहा मोदीजी के पुतले को सरदार सरोवर में डूबा देना यह जरुर प्रतीकात्मक था लेकिन आज जो जन्मदिन मना रहे है दूसरों को म्रत्यु दिलाने में कम कुछ गलत नहीं सोचते है यह जाहिर करते हुए प्रतीकात्मक कार्यक्रम में बहुत सारे घाटी के भाई बहनों ने अपने हाथ लगाये |

साथीयों आज कुछ धार और बडवानी के लोगों को कुछ तकलीफे जरुर हुई होगी लेकिन आज घाटी के लोग भुगत रहे हैं टापू की जमीन , खेतों की बर्बादी , गांवों की चिखल्दा, खापरखेडा, सेंगावा निसरपुर, एकलबारा जैसे गांवों की हत्या पुनर्वास की नीतियां और क़ानून के अनुसार पात्रता होते हुए भी हजारों को लाभ न दिलाना उससे ही यह आक्रोश उठा और इसके सामने एक तरह से उजवनी जो कहते हैं जो उन्होंने बांध को सजाकर और रोशनाई के बीच मोदीजी ने करना और पर्यटन की योजनाओं को आगे धकेलना और एक झूठा दावा केवडीया में पर्यावरण, प्रकृति, और विकास का समन्वय हो रहा है इस प्रकार से करना घाटी को मंजूर नहीं था और इसीलिए आज का धिक्कार दिवस पर हजारों नर्मदा निवासीयों ने जो नर्मदा भक्त भी है अपने नर्मदा बचाओ और नर्मदा को बहने रखने का नारा तो दिया ही पर ठोस मांग और चेतावनी भी दे दी की नर्मदा में भूकंप आ रहा है पर्यावरण और प्रकृति का बहुत ही बड़ा नुकसान हुआ है यहा की खेती की बर्बादी से अन्य सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है नर्मदा के सरदार सरोवर के गेट्स खुले रखकर 122 मीटर तक पानी भरे रखना यही उपाय है जिससे निचेवास के भरूच और अंकलेश्वर जिले भी बचेंगे मछुआरे और केवट भी अपनी रोटी पायेंगे और उपरवास में बडवानी, खरगोन, अलीराजपुर, धार के लोगों को भी अपना हक बचाकर रखने का संभव होगा आज अलीराजपुर में भी सेंकडों आदिवासीयों ने जयस संगठन और एनी आदिवासी संगठनों ने समर्थन पाते हुए कहा की भिताड़ा हो की ककराना हो , या जलसिंधी हो की ग्राम चिल्कदा हो आज गुजरात गए हुए लोग भी पुनर्वासित नहीं हुए और मध्यप्रदेश में पहाडी आदिवासीयों के लिए एक भी पुनर्वास नहीं बनाया उन्हें झूठ प्रकार से पात्रता होते हुए भी नकारा जा रहा है आज महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के कलेक्टर कार्यालय पर सेंकडों सरदार सरोवर विस्थापितों ने अपना डेरा डाला लतिका ताई, चेतन भाऊ, नुरजी वसावे, और मंग्लेया भाई के नेतृत्व में उन्होंने अपनी आवाज तो उठायी ही लेकिन जिला अधिकारी नंदुरबार से 16 अगस्त के बाद फिर से एक एक मुद्दे पर चर्चा करते हुए फिर से वह वही डटे हुए है | जिंदाबाद

नर्मदा घाटी करे सवाल जीने का हक या मौत का जाल

देवराम कनेरा, रणवीर तोमर, मुकेश भगोरिया, रामेश्वर भीलाला, कैलाश यादव, कमला यादव, श्यामा मछुआरा, मेधा पाटकर

error: Content is protected !!