कोरोना महामारी के बाद लॉक डाउन के चलते ही सही उत्तराखंड के बंजर हुए गांव में प्रवासी उत्तराखंड यों की बढ़ती तादाद को देखते हुए उन्हें मछली भात खिलाने की योजना पर काम हो रहा है ताकि कम से कम कोरोना संक्रमण के खतरे से निपटने तक तो गांव में ही कृषि से संबंधित रोजगार से लोगों की आजीविका चल सके। सरकार को लगता है की डिजास्टर के खौफ से हुए इस रिवर्स माइग्रेशन के दौरान गांव में कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाय तो खाली बैठे लोगों को काम भी मिलेगा और पेट भरने के लिए अनाज भी। डीएम उत्तरकाशी ने इसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं। जिसके बाद लंबे समय से बंद पड़ी सिंचाई नहरों और गुणों को साफ सफाई कर खेतों में पानी पहुंचाने लायक बनाया जा रहा जाएगा और खेती के साथ मौन पालन आदि को बढ़ावा देने की के भी निर्देश दिए गए हैं
गिरीश गैरोला उत्तरकाशी
जिलाधिकारी ने कहा कि वैश्विक महामारी में आर्थिकी मजबूत करने के लिए जनपद में कृषि उत्पादन की क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जनपद में कोरोना वायरस संक्रमण के चलते भी लोग विभिन्न स्थानों से अपने पैतृक गांवो/घरों में आयें है। इस हेतु उनकों भी कृषि के जरिए उन्हें अपने घरों में ही रोजगार से जोड़ा जा सकता है।
जिलाधिकारी ने कृषि उत्पादन क्षमता बढ़ाने हेतु धरातलीय स्वरूप देने के लिए खेती करने की पहली प्राथमिकता सिचाई को लेकर सभी नहर व गुलों का सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए हैं। ताकि ऐसी नहरें व गुल जो मिट्टी पत्थरों आदि से बंद है उन्हें शीघ्र संचालित कर खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। जनपद में आलू की पैदावार बढ़ाने के साथ ही हल्दी,अदरक व अन्य फसलों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिए । ट्राउट मछली पालन इस दौर में अहम साबित हो सकता है। इसलिए मछली पालन से सम्बंधित कार्य युद्ध स्तर पूर्ण करने को कहा। किसानों की ओर से मौन पालन के लिए भी बड़ी संख्या में मांग आ रही है। इस हेतु सम्बंधित विभाग को आवश्यक कार्य करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनरूप मनरेगा में वही कार्य किये जायें जो सीधे गरीब लोगों से जुड़े हो।
जिलाधिकारी ने समस्त खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अपने ग्राम विकास व ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों के माध्यम से मनरेगा के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों को सोशल डिस्टेंस, माक्स अनिवार्य रूप से पहनने,व सैनिटाइजर का उपयोग करने का गहनता से प्रशिक्षण देना सुनिश्चित करेंगे।
यदि लोगों को लॉक डाउन खुलने से पहले रोजगार पर व्यस्त नहीं किया गया तो लोग डाउन खुलने के तुरंत बाद सड़कों पर बढ़ी हुई भीड़ को कंट्रोल करना पुलिस प्रशासन के लिए मुश्किल हो जाएगा। लिहाजा लॉक डाउन खुलने से पहले ही अपने घरों को जाने की के लिए तैयार बैठे मजदूरों को काम पर लगाने तथा बाहर से अपने अपने गांव में पहुंचे लोगों को कृषि काम में व्यस्त कर हेफजोर्ड की स्थिति से बचा जा सकता है। देखने वाली बात यह होगी की एसी रूम में तय की गई यह बातें धरातल पर कितनी और कब तक अपना असर कर पाती हैं
