चरस, स्मैक और गांज से भी राजस्व मिले तो ….लोग तो पी ही रहे है न।

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हिलटॉप की अपार सफलता के बाद भांग की खेती के ब्रांड एंबेसडर भोले .

गजेंद्र सिंह रावत वरिष्ठ पत्रकार देहरादून

धार्मिक नगरी में वर्षो से चल रहे धार्मिक पर्यटन से हटकर प्रदेश के ताल बुग्याल झरनों और पहाड़ियों पर भले ही राज्य सरकारें पर्यटन को आकर्षित न कर पाई हो किन्तु नशे के फील्ड में ऐसा नही है। यहाँ सारे मान्यताओं को ताक पर रखकर जिस तरह नशे से राजस्व कमाने की होड़ लगी है उससे आने वाले दिनों में नशे का कारोबार सरकारी संसाधनों से फल फूल सकता है। पहाड़ और मैदान के बीच बढ़ता अंतर लोगो को जो कुछ करने को मजबूर कर रहा है सरकारे उसे परंपरा मानकर चलने लगी है। शराब पीने में जब देवभूमि को शर्म नही तो बेचने में क्यों, यह तर्क देने वालो को भांग चरस स्मैक गांजा आदि पर भी अपने तर्क देने चाहिए, आखिर लोग तो पी ही रहे हूं और राजस्व जो बढ़ाना है न ?

वरिष्ठ पत्रकार गजेंद्र रावत की वाल से।

_उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन के बीच इन दिनों कांवड़ मेला चल रहा है । देवप्रयाग में हिलटॉप की अपार सफलता के बाद अब नीलकंठ मार्ग पर भोले शंकर का चिलम पीता फोटो लगाया गया है । उत्तराखंड में भांग की खेती प्रस्तावित है ऐसे में भोले शंकर का या फोटो भांग की खेती की और उत्तराखंड सरकार के बढ़ते कदमों को पुख्ता करता है ।

उत्तराखंड के हर गली मोहल्ले में शराब की दुकान है और बार के लाइसेंस लगातार दिए जा रहे हैं । अब तो स्कूल कॉलेजों मंदिरों के आसपास भी लगातार लाइसेंस जारी हो रहे हैं। सरकार द्वारा नशे से राजस्व कमाने की स्पीड से ऐसा लग रहा है कि अब अफीम चरस गांजा की ब्रांडिंग होनी बाकी रह गई है वैसे भी देहरादून मे स्मैक का कारोबार चरम पर है देखना है कि कब तक यह घर-घर तक पहुंचता है जय हो उत्तराखंड सरकार की हर हर महादेव बम भोले

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