वैष्णो देवी की तर्ज पर उत्तराखंड के चारधाम में व्यवस्था श्राइन बोर्ड के जिम्मे -कैबनेट ने किया प्रस्ताव पारित – पुरोहितों ने जताया विरोध ।

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देहरादून।

वैष्णो देवी और तिरुपति बालाजी की तर्ज पर उत्तराखंड के चार धाम में व्यवस्था का जिम्मा अब श्राइन बोर्ड को देने के लिए कैबनेट ने प्रस्ताव पारित कर दिया है। चार धाम यात्रा में यात्रियों की बढ़ती भीड़ और यात्री सुविधा जुटाने के लिए लाए गए इस प्रस्ताव में पुरोहितों के हक हकूक बरकरार रखे जाने की बात कही गयी है।

गिरीश गैरोला।

चारों धामों के लिए अलग से यात्रा संचालन व्यवस्था बनाने के मामले में मंत्रिमंडल ने वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड से लेकर अन्य प्रसिद्ध मंदिरों की संचालन व्यवस्था का अध्ययन भी कराया। मंत्रिमंडल ने माना कि 1986 में बने वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के गठन के बाद से वहां की यात्रा व्यवस्था में अभूतपूर्व परिवर्तन आया।

मंदिर को मिली धनराशि से पर्याप्त विकास हुआ। बताया जाता है कि बदरीनाथ में 1939 से पहले सारा चढ़ावा रावल के पास ही जाता था। 1939 के बाद रावल के पास धार्मिक व्यवस्था के अधिकार रह गए थे। माना जा रहा है कि श्राइन बोर्ड के गठन के बाद चारों धामों की यात्रा व्यवस्था में भी बदलाव आएगा। यात्रियों को अधिक सुविधाएं दी जा सकेंगी।

चारधाम के तीर्थ पुरोहितों ने चारधाम श्राइन बोर्ड के गठन का विरोध शुरु कर दिया है। उन्होंने श्राइन बोर्ड के विरोध में आंदोलन का ऐलान कर दिया है। देहरादून में एक रेस्टोरेंट में आयोजित पत्रकार वार्ता में गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि तीर्थ पुरोहित विधानसभा का घेराव करेंगे। दो दिन में चारों धामों में आंदोलन होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर तीर्थ पुरोहितों से झूठ बलने का आरोप लगाया। कहा कि अब वृहद आंदोलन होगा।

प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में चारधाम श्राइन बोर्ड विधेयक को मंजूरी दी गई  है। राज्य गठन के बाद से ही उत्तराखंड के प्रमुख मंदिरों को शामिल करते हुए श्राइन बोर्ड के गठन की मांग की जाती रही है। 80 साल की व्यवस्था को सरकार ने बदला तो दशकों से चारों धामों में पूजा अर्चना करने वाले तीर्थ पुरोहित विरोध में उतर आए। वे सरकार पर छल करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि जब राज्य विधि आयोग उनसे श्राइन बोर्ड कानून को लेकर सुझाव मांग रहा था, प्रदेश मंत्रिमंडल ने इसके गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

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