चुनाव की गर्मी में नागराज के बजीर से मिली दूध की ठंडक

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सुख समृद्धि और अन्न धन के दाता एक दर्जन से अधिक गांवो के इष्टदेव भगवान नागराजा का वर्ष मे एक बार मनाया जाने वाला मेला आठ दिन बाद आज डिमकी मे पूर्ण हो गया।

सुरेश रमोला ब्रह्मखाल

आश्विन मास की संक्रान्ति को दनाऊ डांडे से इस मेले की शुरूवात हुई थी जुणगा डांडा नागराजा होते डिमकी मे आज तक संपन्न हुये मेले मे लाखो लोगो ने आस्था की भेंट चढाई। पंचायत चुनाव के चलते इस दौरान गांवो मे राजनीतिक माहोल गर्म है जिससे भीड भाड का होना लाजमी है। मेले मे गांव की द्याणियों ने रात भर चौपाल पर रासौं तांदी नृत्य लगाकर माहोल भक्तिमय बना डाला। युवाओं और बुजुर्गों ने भी देवता की पालकी को श्रद्धा के साथ झुलाया और श्रद्धालुओं ने अपने इष्ट से मन्नाते मांगी। मान्यता के अनुसार खेतो मे लहलहरा रही पक्की हुई फसल का खूब भंडार भरने के लिए लोग अपने इष्ट को मनाते है और देवता के बजीर को दूध की धार से नहलाते है। अब आठ दिन तक आयोजित होने वाले इस नागराजा के मेले का समापन हो गया देवता की पालकी भंडारे मे रख दिया गया है जो अब एक साल बाद ही बाहर आयेगी।

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