टिहरी राजशाही की स्मृति- खंडहरों से निकल सकता है पर्यटन

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खंडहर बताते है कि कभी इमारत बुलंद थी।
टिहरी राजशाही की स्मृति राजगढ़ी बन सकती हसि पर्यटन का आधार।
गिरीश गैरोला
टिहरी राजशाही अब भले ही इतिहास के पन्नो में दब गई हो किन्तु इसके निसान आज भी देखे जा सकते है।
टिहरी राजशाही का एक बड़ा हिस्सा अंग्रेजो को नजराने में देने के बाद भी टिहरी उत्तरकाशी का एक बहुत बड़ा हिस्सा लंबे समय तक रियासत के कब्जे में रहा। उस दौर में जब आवागमन के  आधुनिक साधन मौजूद नही थे उस वक्त सुदूर जंगली रास्तो से पैदल अथवा घोड़ो पर चलकर राजकाज चलाना काफी मुश्किल रहा होगा।
वर्तमान उत्तरकाशी जिला उस वक्त रावाई परगने का ही एक हिस्सा हुआ करता था।
पहाड़ी इलाको में ऊंचे स्थान से चारो तरफ नजर रखने के लिए टिहरी राजा के द्वारा कैम्प बनाये गए थे जिनमें राजगढ़ी भी एक था ।

राजगढ़ी टिहरी रियासत काल से ही एक ऐतिहासिक स्थल रहा है। टिहरी रियासत के समय यह रावाई

परगना व मिनी राजधानी थी । इतिहासकारों के अनुसार 17 वीं शताब्दी में जब गोरखो ने
 गढ़ पर आक्रमण किया तब क्षेत्रीय जनता के सहयोग से यहां पर एक किले का निर्माण किया गया जो राजगढ़ से अब राजगढ़ी कहलाता है ।
यह स्थल समुद्र तल से 1786 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है,  इसके पूर्व में राडी का पर्वत,  पश्चिम की ओर बनाल का क्षेत्र उत्तर की ओर सरनौल और बनाल का क्षेत्र तथा दक्षिण की ओर बड़कोट  , नौगांव का क्षेत्र पड़ता है । रियासत काल में जौनपुर बंगाण, मुगरसन्ति ,  बड़कोट गीठ,  वजरी तक के मुकदमों की सुनवाई राजगढ़ी में ही होती थी।
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https://youtu.be/_i9AwRggw5c
सन 1948  में भारत सरकार में टिहरी रियासत के विलय के समय तक यही स्थिति रही। तत्पश्चात तहसीलों का  सृजन किया गया जिसमें राजगढ़ी भी एक थी संपूर्ण रावाई का  कोषागार राजगढी में ही  था यहां प्राथमिक पाठशाला का प्रारंभ 1902 में हुआ सन 1949 में प्राथमिक पाठशाला का उच्ची करण जूनियर हाई स्कूल में हुआ। 1962 में जूनियर हाई स्कूल से हाई स्कूल तथा 1975 में हाईस्कूल का उच्चरण इंटरमीडिएट में हुआ।
टिहरी राजशाही के भारत गणराज्य में विलय के बाद सत्ता दिल्ली के हाथों में चली गयी हो किन्तु लंबे समय तक टिहरी की जनता ने राजपरिवार को राजा की तरह ही सम्मान दिया, यही वजह रही कि कुछ अपवाद को छोड़ कर टिहरी संसदीय  क्षेत्र से अभी तक टिहरी राजशाही का ही प्रतिनिधित्व रहा। लोकतंत्र की परिभाशा कुछ भी कहती हो किन्तु इलाके में आज भी कुछ लोगो का राजा के प्रति  आज भी वही सम्मान झलकता है।
भारतीय सेना से सेवा निवृत्त जयवीर सिंह    जयाडा आज भी बीजेपी के साथ  राज भक्त भी है और उनका जीने का अंदाज भी आम लोगो से हटकर दिखाई देता है। राजगढ़ी के पास ही उन्होंने अपना छोटा सा महल बनाया है। उनसे मिलने की तीव्र इच्छा हमे उनके आवास तक खींच लाई।  घर से बाहर होने के चलते पूर्व फौजी जयवीर सिंह जयाडा से मुलाकात तो नही हो सकी किन्तु उनकी धर्मपत्नी ने बताया कि आज भी प्रति दिन राजनैतिक दलों के नेता पत्रकार और इतिहासकार उनसे मिलने प्रतिदिन पहुँच ही जाते है।
https://youtu.be/_i9AwRggw5c

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