मोदी के दौरे से भगवान की भी बढ़ी उम्मीद।
1962 से अपनी जमीन वापसी की कर रहे है मांग।
चीन युद्ध 1962 के बाद ग्रामीणों की जमीन पर सेना का कब्जा।
गिरीश गैरोला।
दीपावली के पावन मौके पर त्योहार को राजधानी दिल्ली की बजाय चीन सीमा पर तैनात भारतीय सीमा के प्रहरियों के साथ उत्तरकाशी पहुँचे पीएम मोदी की मुलाकात सीमांत गाँव बागोरी के ग्राम प्रधान भगवान सिंह राणा से भी हुई। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि किस तरह से 1962 की भारत चीन युद्ध के बाद उन्हें उनके मूल गाँव नीलांग जाडुंग से हटा दिया गया था और पूरा इलाका भारतीय सेना के हवाले कर दिया गया था। किन्तु बदले में उन्हें न तो मुआवजा मिला और न कोई जमीन।
जाट भोटिया समुदाय के ये लोग भेड़ पालन और ऊन के व्यवसाय से जुड़े है और फिलहाल हरसिल के पास बागोरी गाँव मे निवास कर रहे है।
पीएम मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि दिल्ली पहुंच कर उनकी बात पर अवश्य कार्यवाही होगी।
दिल्ली दरबार का फरमान आया तो उत्तरकाशी प्रशासन भी हरकत में आ गया । एसडीएम भटवाड़ी देवेंद्र नेगी ने ग्रामीणों और भारत तिब्बत सीमा पुलिस के अधिकारियों के साथ 21 दिसंबर की इस संबंध में बैठक ली। ग्राम प्रधान बागोरी भगवान सिंह ने बताया कि आईटीबीपी ने उनकी आधी जमीन लेने पर सहमति जताई है। ग्रामीणोंका कहना है कि या तो उन्हें उनकी पुस्तैनी जमीन पर फिर से बसाया जाय अथवा उनकी पूरी जमीन का उन्हें मुआवजा दिया जाय, ग्राम प्रधान भगवान सिंह ने कहा कि आधी जमीन लेने की पेसकस को ग्रामीणों ने नकार दिया है।
बहरहाल वर्षो से अपनी मांग को लेकर विभागो के चक्कर काट रहे भोटिया जाट समुदाय के भगवान को भी मोदी के दीवाली दौरे के बाद उम्मीद बढ़ गयी है।
https://youtu.be/YZOhszgFXMI
