भू बैकुंठ के नाम से विख्यात उत्तराखंड की चारधाम का प्रमुख बद्रीनाथ धाम कपाट खुलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी के नाम पहली पूजा से सुरुवात हुई तो श्रद्धालुओं की गैरमौजूदगी में तीर्थ पुरोहितों ने ही शहीद कोरोना वॉरियर्स के बैकुंठ धाम प्राप्ति कामना के साथ ब्रह्मकपाल में मोक्ष क्रिया को संपन्न किया।
श्री बदरीनाथ धाम मे कपाट खुलने के साथ ही भले ही श्रद्धालु पूरी तरह नदारत रहे वही पहला पिंडदान बद्रीनाथ के तीर्थ पुरोहितों द्वारा कोरोना संक्रमण से मरने वाले लोग, कोरोना से जंग लड़ते जिनकी मौत हुई, और देश की सीमा पर देश की रक्षा करते हुए लॉक डाउन के दौरान कश्मीर में शहीद हुए जवानों का बद्रीनाथ के ब्रह्म कपाल में पिंडदान और तर्पण कर मोक्ष की कामना की गई और जल्द देश को कोरोना मुक्ति की कामना की गई,
सँजय कपरूवाण
मान्यता है कि बद्रीनाथ धाम में स्थित ब्रह्मा कपाल में खुद भगवान शिव को भी ब्रहम हत्या के पाप से मुक्ति मिली थी, पांडवों ने भी स्वर्गारोहिणी के समय अपने पितरों को इसी स्थान पर तर्पण और पिंडदान किया था ।
बद्रीनाथ धाम को इसीलिए मोक्ष का धाम कहा जाता है कहते है कि ब्रह्मकपाल में पिंड दान करने से 8 गुना अधिक फल प्राप्त होता है ब्रह्मा जी का पांचवा सिर इसी स्थान पर आकर भोलेनाथ के त्रिसूल से छुटा था इसीलिए इसको ब्रह्म कपाल नाम से जाना जाता है और यहां पर पिंड दान का विशेष महत्व होता है,
ऋषि प्रशाद सती – तीर्थ पुरोहित ब्रह्म कपाल बदरीनाथ
