डॉ० नामदेव ने कहा कि महाकवि बनने के लिए जो शर्ते होनी चाहिए वह सब मलखान सिंह के काव्य संग्रह में दिखाई पड़ती हैं| आगे उन्होंने कहा कि उनकी कविताएं जितनी सरल सहज एवं सजीव है उनका व्यक्तित्व उतना ही सरल सहज है | वे कविता में और कविता से बाहर आम आदमी की तरह हमारे सामने आते हैं|
अंकित तिवारी।

दलित महाकवि मलखान सिंह की पुत्री श्वेता सिंह ने कहा कि “मेरे पिता मेरे लिए पिता की तरह थे और महान व्यक्तित्व की तरह भी | ऐसे लोग समाज में बहुत कम होते हैं पर यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मैं ऐसे ‘आम आदमी के कवि’ की पुत्री हूं जो आम आदमी की वेदनाओं की आवाज़ प्रखर आवाज थें | वे हमारे बीच साहित्य के रूप में हमेशा जिंदा रहेंगे|”
डॉ० सूरज बड़त्या ने कहा कि क्रांतिकारी कवि मलखान सिंह दलित साहित्य में कविता के रूप में पहले स्थान पर हैं इसके बाद ओमप्रकाश वाल्मीकि, जयप्रकाश लीलवान इत्यादि दलित कवियों का नाम लिया जा सकता है |
डॉ०अनिता भारती ने कहा कि उनका काव्य संवाद का काव्य है, वे बताते थे ‘संवाद के बिना बेहतर कविता और समाज की कल्पना नहीं की जा सकती|’
अंग्रेजी विषय के प्रोफेसर प्रमोद मेहरा ने उनकी कविताओं का हिंदी अनुवाद करते समय आयी दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा कि महाकवि मलखान सिंह की कविताओं के शब्द अधिकतर ग्राम संस्कृति से आते हैं जिनका अनुवाद करना बेहद कठिन हो जाता है उससे भी कठिन उनमें नए अर्थ और शक्ति को अनुवाद के रूप में अभिव्यक्त करना |
डॉ० सरोज कुमारी ने क्रांतिकारी कवि मलखान सिंह को सादगी एवं सहजता का कवि कहा| वही सुदेश तंवर ने उन्हें जन चेतना का ककि कहा आगे उन्होंने कहा कि वे पिछड़ों, वंचितों, किसान, मजदूरों दमित स्त्रियों की आवाज थे | डॉ० नीलम ने कवि की कविताओं का वाचन करते हुए अपने अनुभव साझा किये | सामाजिक कार्यकर्ता एवं कवियत्री पुष्पा विवेक ने कवि की स्मृति में स्वरचित कविता का वाचन करते हुए अपनी कविता समर्पित की |
आदिवासी साहित्य की युवा कवयित्री नितिशा खलखो ने उन्हें अस्मिता विमर्श की वकालत करने वाले कवि के रूप में देखा | जेएनयू के शोध छात्र अशोक बंजारा ने महाकवि मलखान सिंह के काव्य का विश्लेषण करते हुए कहा कि वे शब्दों, प्रतीकों और बिंबों में नया अर्थ स्थापित करने वाले जनकवि हैं |
