
नगर ट्रैफिक संचालन में कभी खौफ का पर्याय बनी काली वर्दीधारी सीपीयू जरूरत पड़ने पर थकें हारें बुजुर्गों के लिए श्रवण कुमार के भूमिका में नजर आ रही है। दरअसल लॉक डाउन की लंबी अवधि में घर से बाहर फंसे प्रवासी उत्तराखंडी जैसे तैसे राजधानी देहरादून पहुँच रहे है जहाँ तैनात सीपीयू कर्मियों की सेवा देख कई बुजुर्ग तो रोते हुए अपने लॉक डाउन के बुरे अनुभव सुनाते है । देहरादून की भूमि को छूते ही उन्हें महसूस हुआ कि उनके कुछ बेटे यहाँ पर भी उनकी चिंता कर रहे है। क्यों न हो जब उन्हें पता चलता है कि थके हारे उनके बुजुर्गों को बस तक गोद मे उठाकर ले जाना वाला व्यक्ति ट्रैफिक सीपीयू का तेज तर्रार सब इंस्पेक्टर संजीव त्यागी है, जो ट्रैफिक नियमो को लेकर जितना कड़क है, अपने बुजुर्गों के लिये उतना ही सरल।
गिरीश गैरोला, मेरु रैबार ब्यूरो देहरादून

काली वर्दी में खूंखार ब्लैक कैट कमांडो की तर्ज पर ट्रैफिक संचालन के दौरान खौफ का पर्याय बने सीपीयू कर्मी भी आपदा की ड्यूटी केे दौरान स्वयंसेवकों की भूमिका में नजर आ रहे हैं। 2 मई से रायपुर स्पोर्ट्स कॉलेज पर तैनात अकेलेे सीपीयू सब इंस्पेक्टर संजीव त्यागी सुबह 7:00 बजे से रात के 9:00 बजे तक प्रवासी उत्तराखं डियों को रिसीव करने से लेकर उनके गंतव्य को जाने वाली बसों तक छोड़ने में लगे हैं। इस दौरान उनके साथ उनके हमराह जितेंद्र कुमार और कंप्यूटर डाटा फीडिंग के लिए ट्रैफिक के दो मुंशी आशीष और जगदीश भी काम कर रहे हैं ।
विगत 15 दिनों से प्रवासी उत्तराखंड यों की सेवा में लगे सीपीयू इंस्पेक्टर संजीव त्यागी ने बताया गुजरात, महाराष्ट्र ,नाशिक, हरियाणा से आने वाले कई लोग भूखे प्यासे होने की शिकायत करते हुए लगभग उनके सामने रोने की स्थित में हो जाते हैं , इन्हें रिसीव करने प्रॉपर मेडिकल कराने के बाद स्थानीय लोगों को सिटी बस के माध्यम से शहर में छोड़ा जा रहा है जबकि पहाड़ की तरफ जाने वाले लोगों को रात्रि निवास और उनके खाने-पीने की व्यवस्था के साथ सुबह पहाड़ों को जाने वाली बसों तक छोड़ा जा रहा है ।इस दौरान लॉक डाउन की अवधि में शारीरिक और मानसिक रूप से थके हारे परेशान कई बुजुर्ग लोग चलने में भी असमर्थ होते है, जिनको अपनी ड्यूटी से इतर एक बेटे की भूमिका में पुलिस सब इंस्पेक्टर संजीव त्यागी अपनी गोद में उठाकर बस तक ले जाने का काम कर रहे हैं। विगत 15 दिनों से ट्रैफिक चालान का काम भूल कर देहरादून के इसी बड़े शहर में पुत्र धर्म निभाते हुए सीपीयू कर्मी गंगोत्री यमुनोत्री और बद्री केदार चार धाम यात्रा से मिलने वाले सुख का एहसास इसी सेवा से कर रहे है।
