पैदल रास्तों से चुप चाप तीन व्यक्तियों के आने की सूचना अफवाह है , सिर्फ एक व्यक्ति ही चिन्यालीसौड़ तहसील अंतर्गत चोरी-छिपे पहुंचा था जिसको पुलिस की मदद से हिरासत में लेकर क्वॉरेंटाइन के लिए भेज दिया गया – आकाश जोशी एसडीएम डुंडा उत्तरकाशी ।
उत्तरकाशी जिले में लंबे समय से चल रहे लौक डाउन से परेशान युवा अब चोरी-छिपे जंगली रास्तों से अपने घर गांव का रुख करने लगे हैं ऐसा ही एक मामला उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ तहसील में देखने को मिला जहां 18 अप्रैल की रात ग्रामीणों ने सूचना दी कि देहरादून से 3 युवक युवक चोरी छुपे चिन्यालीसौड़ में प्रवेश किए हैं, जिनमें से एक युवक को अगले दिन पुलिस की मदद से हिरासत में लेकर क्वॉरेंटाइन के लिए भेज दिया गया था, एसडीएम डूंडा आकाश जोशी ने बताया कि 3 लोगों की चोरी-छिपे आने की खबर भ्रामक है, इस तरह की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन एक्ट में कड़ी कार्यवाही की जाएगी, जबकि ग्रामीणों का कहना था कि वें खुद की और कम्युनिटी की सुरक्षा के लिए शासन पशासन को सूचना दे देने का काम कर रहे हैं। सूचना की जांच कर सही और गलत बताना जिला प्रशासन का काम है इसके लिए उनके पास संसाधन कम हो या ना हो आखिर सूचना की वेरिफिकेशन उन्हीं से मिल सकती है, इसके लिए वे हर संभव पूर्व की भांति प्रशासन का सहयोग करने को तैयार हैं।
दरअसल लौक डाउन डाउन के चलते बाहरी जिलों और राज्यो में किराए के कमरों में बंद लोग जब अपने घर गांव के लिए ई पास अप्लाई कर रहे हैं तो या तो उन्हें जवाब नहीं आ रहा है या रिजेक्ट हो जा रहा है जिसके बाद ये युवक जाने अनजाने चोरी-छिपे गाव पहुंचने अपराध कर रहे हैं। दरअसल इन्हें यदि पास मिल भी जाता है तो उसके बाद उस व्यक्ति को 14 दिन तक इंस्टीट्यूशनल क्वॉरेंटाइन के लिए भेजा जा रहा है ।
बात करे उत्तरकाशी जिले की तो जब तक आइसोलेशन और क्वॉरेंटाइन सेंटर नहीं बनाए गए थे तब तक सैकड़ों लोगों को उनके घरों में ही आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के भरोसे होम क्वॉरेंटाइन कराया जा रहा था, अब पर्याप्त बजट जारी होने के बाद कई स्थानों पर क्वॉरेंटाइन सेंटर बना दिया गया है। जिसके बाद सभी नए आने वालो को क्वॉरेंटाइन की सलाह दी जा रही है ।
इस सलाह पर इस आदेश पर कितनी सख्ती से पालन किया जा रहा है इसका उदाहरण इस बात से समझा जा सकता है कि उत्तरकाशी जिले के एक वरिष्ठ डॉक्टर को भी देहरादून से वापस आने के बाद बॉर्डर पर क्वॉरेंटाइन के लिए भेज दिया गया था। हालांकि यह अलग बात है की पुलिस, स्वास्थ्य कर्मियों , सफाई कर्मियों , राशन और जरूरी सामन ट्रांसपोर्ट में लगे लोगों और मीडिया कर्मियों को आवश्यक सेवा में शामिल किया गया है , इसके साथ ही समाज के बीच सिविल सोसाइटी से भी कई स्वयं सेवकों को राहत वितरण के दौरान पुलिस के साथ जाने के पास निर्गत किए गए हैं ये लोग भी पुलिस स्वास्थ्य कर्मी और सफाई कर्मियों की तरह खुद को खतरे में डालकर जनहित के काम में जुड़े हुए हैं । ये लोग भी दिनभर अपना काम निपटाने के बाद रात को अपने परिवारों के साथ रह रहे हैं , जिससे उनके परिजनों के भी संक्रमण का खतरा हो गया है ।
सभी जिलों के बॉर्डर पर पुलिस और मेडिकल दोनों टीमें तैनात हैं किसकी जांच की जानी है किस का सैंपल लिया जाना है और किस व्यक्ति को होम और किसे इंस्टीट्यूशनल क्वॉरेंटाइन के लिए भेजा जाना है, यह प्रशासन और मेडिकल दोनों विभागों को आपसी तालमेल के साथ तय करना होता है। देहरादून निवासी शशि सेमवाल ने बताया कि उनके पति दून अस्पताल वार रूम में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में ड्यूटी दे रहे हैं लॉक डाउन से पहले वह किसी काम से दिल्ली गई थी और तब से दिल्ली में ही फंसे हुए हैं , दून अस्पताल वार रूम में ड्यूटी करने के बाद उनके पति को बच्चोंं की जिम्मेदारी के साथ खुद घर के काम निपटा कर फिर अगले दिन ड्यूटी पर जाना होता है किंतु बार-बर बार बार आवेदन के बाद भी उन्हें दिल्ली से देहरादून आने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
