शराबियों की जेब टाइट तो ठेकों ने भी किए हाथ खड़े — बंद होंगे ठेके? यातायात बहाल होने तक मंदी पर पूरा व्यापार।

Share Now

कोरो ना महामारी के बाद हुए लोग डाउन से उबरने के लिए शराबियों के भरोसे अर्थव्यवस्था सुधारने का प्रयोग भी डावाडोल होता नजर आ रहा है । दरअसल लौक डाउन के बाद 4 मई को शराब की दुकानें खुलने के बाद शराब खरीदने के लिए 2 से 3 किलोमीटर की लंबी लाइन दिखने से उम्मीद जताई जा रही थी कि प्रदेश में लोक डाउन  के दौरान हुए राजस्व के नुकसान की भरपाई शराब प्रेमियों के शौक के चलते  पूरी हो  सकेगी किंतु अभी तक जारी कर्फ्यू जैसे  प्रतिबंधों के चलते शराब की दुकानदारों ने भी हाथ खड़े कर दिए है और मांगे पूरी होने तक उन्होंने भी दुकानें बंद रखने का फैसला लिया है।

क्या है मांगे


  कोविड टैक्स हटाया जाए।
मार्च या उससे पहले का जो स्टॉक ना उठा हो उसका रिफंड मिले।
नवीनीकरण की दुकानों में अवशेष स्टॉक अधिभार का रिफंड मिले।
शराब-बियर पर लाभ 25% हो।
लॉकडाउन में नवीनीकरण की फीस और लाइसेंस फीस माफ की जाए।
शराब कारोबारियों पर दर्ज मुकदमे भी वापिस किए जाएं।

22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद से ही शराब की दुकानों को बंद करने के आदेश मिल गए थे जो 4 मई को खोले गए। बाजार बंदी में ढील के बावजूद यातायात टैक्सी – बस सुविधा सुचारू न होने से आम लोगों का आवागमन नहीं हो पा रहा है जिसका सीधा फर्क बाजार के अन्य कारोबार के साथ शराब की दुकानों पर भी पड़ रहा है। शराब कारोबारियों की माने तो 30 से 40 परसेंट ही बिक्री हो पा रही है ऐसे में सरकारी राजस्व की भरपाई करना मुश्किल हो रहा है ।उन्होंने सुझाव दिया है कि जब तक लौक डाउन का असर समाप्त नहीं होता तब तक वास्तविक बिक्री के आधार पर अधिभार जमा करवाया जाए । हालांकि उत्तराखंड कैबिनेट ने लौक डॉन के दौरान अनुज्ञा पियो को कुछ राहत दी थी , लेकिन इससे घाटा पूरा न होने की बात कहीं जा रही है।

आबकारी इंस्पेक्टर ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि उत्तरकाशी जिला मुख्यालय की शराब की दुकान की बात ही की जाए तो उसे प्रति माह उसे एक करोड़ 5 लाख का राजस्व ही जमा करना होता है कुल रकम शराब की कीमत मिलानके के बाद करीब ढाई करोड़ रुपए प्रति महीने बैठती है , जिसके लिए प्रतिदिन की बिक्री करीब आठ लाख से ऊपर हो तभी महीने के ढाई करोड़ जमा की जा सकते है । एक अनुमान के मुताबिक 4 मई को शराब की दुकान खोलने के बाद 2 से 3 दिन तक शराब की अच्छी बिक्री भी किंतु उसके बाद 30 से 40 की बिक्री हो पा रही है ऐसे में अनुयायियों को दुकानें बंद करने के अलावा कोई उपाय नहीं सूझ रहा है।

उत्तरकाशी आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि शराब कारोबारियों के साथ बातचीत कर कोई सार्थक हल निकालने का प्रयास किया जा रहा है हालांकि जिले स्तर से इस पर कोई भी राहत देना संभव नहीं है ।पूरा मामला उत्तराखंड कैबिनेट के निर्णय के बाद ही कुछ कहना संभव हो सकेगा

error: Content is protected !!