उड़ीसा की तर्ज़ पर उत्तराखंड में मिले कोरोना वारियर्स को “शहीद” का दर्जा, राजकीय सम्मान से हो “अन्तिम संस्कार”
ये देश के लोगों द्वारा दिया गया सम्मान ही है जो मेडिकल , पुलिस ,पर्यावरण मित्र और मीडिया की संपूर्ण टीम अपनी जान की चिंता किए बगैर कारों ना के खिलाफ जंग में के मैदान में उतर गई है। वॉरियर्स का मनोबल बना रहे और देश सुरक्षित रहे इसके लिए उत्तराखंड सरकार को उड़ीसा सरकार का अनुसरण कर कोरोनावायरस से संक्रमण के दौरान मौत हो जाने पर वारियर्स को शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए । ताकि टीम के सभी लोग इस उम्मीद पर पूरे मनोयोग से ड्यूटी पर लगे रहें कि खुदा ना करें अगर उनके साथ कोई हादसा हो जाता है तो उनके परिवार को कोई आर्थिक हानि नहीं होगी साथ ही उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाता रहेगा कि उनके पिता राष्ट्र हत के लिए शहीद हुए हैं।
देश में संवैधानिक चुनाव के दौरान भी चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को बीमा कराया जाता है लोकतंत्र भी तभी रहेगा जब लोग जिंदा रहेंगे लिहाजा इस समय की जिम्मेदारी अन्य सभी जिम्मेदारियों से बढ़कर है।
गिरीश गैरोला
एक तरफ जहां कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ने वाले कोरोना योद्धाओं, मसलन डॉक्टर्स और सभी स्वास्थ्यकर्मियों को लेकर ओडिशा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ऐलान किया कि अगर कोरोना वायरस महामारी से जंग लड़ रहे कोरोना वॉरियर्स की मौत होती है तो उन्हें में शहीद का दर्जा दिया जाएगा और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अभी तक इस तरह की घोषणा करने के मामले में पिछड़ गये हैं, जबकि अगर उत्तराखंड सरकार भी ऐसा ही फैसला लेती है तो इससे कोरोना वारियर्स का मनोबल तो बढ़ेगा ही, साथ ही यह उनके लिए सम्मान की भी बात होगी।
ज्ञात है कि कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में डटे स्वास्थ्यकर्मियों के भी कई जगह पॉजिटिव होने का मामला सामने आया है। ऐसा ही एक मामला उत्तराखंड से सटे उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में भी आया है, जहां फ्रन्टलाइन कोरोना वारियर का अहम रोल निभा रहे आरबीएसके के एक युवा आयुष चिकित्सक डॉ० निजामुद्दीन, उम्र 36 वर्ष की कोरोनावायरस संक्रमण के चलते मौत हो गयी। उनकी डयूटी तब्लीगी जमात के सर्वे में लगी थी। उत्तरप्रदेश में कोरोनावायरस संक्रमण की वजह से डॉक्टर की मौत का यह पहला मामला है।
राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ० डी० सी० पसबोला द्वारा बताया गया कि उत्तराखण्ङ में भी जहां मुख्य रूप से आयुष डॉक्टर्स एवं स्टाफ ही फ्रन्टलाइन कोरोना वारियर्स की भूमिका निभा रहे हैं, और अगर उत्तर प्रदेश की तरह यहां भी किसी आयुष डॉक्टरों के साथ कुछ अनहोनी होती है तो यहां पर उड़ीसा राज्य की तरह डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मियों के सम्मान हेतु कोई भी घोषणा उत्तराखण्ड सरकार द्वारा नहीं की गयी है। जबकि आज के अपडेट के अनुसार उत्तराखण्ड राज्य में कुल मिलाकर 46 कोरोना +Ve मरीज हैं और हजारों कोरोना संदिग्ध कोरन्टाइन किए गए हैं, जिनसे कोरोना वारियर्स के भी संक्रमित होने की संभावनाएं बनी रहती हैं।
इस सम्बन्ध में संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ० डी० सी० पसबोला एवं प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ० अजय चमोला द्वारा प्रदेश सरकार से मांग की गयी है कि उड़ीसा कि तर्ज पर उत्तराखण्ड में भी कोरोना वारियर्स को शहीद का दर्जा देने एवं राजकीय सम्मान से अन्तिम संस्कार की व्यवस्था के सम्बन्ध में घोषणा की जाए।
