देहरादून: लंबे समय से घरो मे छुट्टी काट रहे नौनिहाल कोरोना काल मे घरो मे रहकर बोर हो गए थे | इस लंबी अवधि मे कुछ ने गाव मे तो किसी ने ननिहाल मे समय काटा – जिनके पास ये सुविधा नहीं थे वे शहरो के डब्बे नुमा घरो की चार दिवारी मे कैद से परेसान हो गए थे | अब इनको इस लंबी कैद से आजादी मिलने जा रही है और अब तक जो बच्चे स्कूल जाने के नाम पर बहाने बनाते थे उनमे भी स्कूल जाने के नाम पर नया उत्साह देखा जा रहा है । स्कूल खुलनेे की कड़ी में पहले शिक्षकों को ही बुलाया जााएग,
फिर परिस्थितियों का आंकलन कर छात्रों को बुलाया जाएगा।
कोरोना वायरस की तीसरी लहर से जु़ड़ी आशंकाओं के बीच, उत्तराखंड में स्कूल खुलने जा रहे हैं। फिलहाल प्रदेश में ऑनलाइन क्लासेज ही चल रही हैं। पिछले साल अक्टूबर तक कई राज्यों में स्कूल खुल गए थे मगर दूसरी लहर आ गई। तीसरी लहर के खतरे के बीच स्कूल खोलने से राज्य हिचक रहे हैं। फिलहाल शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के द्वारा शिक्षकों को स्कूल आने के निर्देश पर शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने आदेश जारी कर दिया है। जिसके तहत शिक्षकों को 12 जुलाई से स्कूल आना सुनिश्चित किया गया है और शैक्षिक गतिविधियां संचालित किया जाना भी सुनिश्चित किया गया है।
अब शिक्षकों को 12 जुलाई से स्कूल आना अनिवार्य किया गया है। एक तरफ जहां सरकार के द्वारा शिक्षकों को स्कूल आने के लिए आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ सरकार के द्वारा प्राथमिकता के आधार पर शिक्षकों को कोविड-19 वैक्सीन लगाई जाएगी। शिक्षा सचिव ने इसको लेकर बकायदा आदेश जारी कर दिए हैं कि शासकीय एवं अशासकीय विद्यालय के शिक्षकों को कोविड 19 के अंतर्गत फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में वर्गीकृत करते हुए प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन लगाई जाए, यानी की शिक्षा विभाग अब शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन लगाई जाएगी।
