सूर्यकांत धस्माना का तीखा हमला, कहा- “शर्म की बात है कि युवा दर-दर भटक रहे हैं, सरकार अदालतों में भी नाकाम”
ओपनिंग पैराग्राफ (Hook Paragraph)
देहरादून की सड़कों पर गूंज रहा है एक ही सवाल — “कब मिलेगा नौकरी का हक़?”
छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन 1352 चयनित एलटी शिक्षक अब भी कोर्ट-कचहरी, निदेशालय और मंत्रियों के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कांग्रेस ने इस मसले को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी कर ली है।

स्क्रिप्ट (Body)
उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का आरोप है कि
“यह सरकार की नाकामी है। शर्म की बात है कि जिन युवाओं का चयन हो चुका है, वो दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। सरकार अदालतों में भी ढंग से पैरवी नहीं कर पा रही!”
धस्माना ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में उस वक्त ये बातें कहीं, जब चयनित एलटी अभ्यर्थियों का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
सरकारी बेरुख़ी पर हमला
धस्माना ने कहा —
“प्रदेश में शिक्षा विभाग की हालत बद से बदतर हो चुकी है। स्कूल खाली हैं, ना हेडमास्टर, ना प्रवक्ता, ना एलटी टीचर। ऊपर से सरकार 1488 स्कूल बंद करने की साजिश कर रही है। बेरोज़गारी और अशिक्षा दोनों बढ़ेंगी।”
उन्होंने ये भी कहा कि यूके-ट्रिपलएसी (UKSSSC) ने छह महीने पहले ही एलटी शिक्षकों की मेरिट लिस्ट जारी कर दी थी, लेकिन सरकार आज तक कोर्ट में मजबूती से केस नहीं लड़ पाई। दो अभ्यर्थियों के स्टे-ऑर्डर के बहाने बाकी हजारों चयनित युवाओं को लटका दिया गया है।
कांग्रेस का ऐलान – सड़कों पर संघर्ष
सूर्यकांत धस्माना ने एलान किया कि कांग्रेस पार्टी अब इस मसले पर चुप नहीं बैठेगी।
“कांग्रेस हर मंच पर इन युवाओं की आवाज बनेगी। जरूरत पड़ी तो पार्टी सड़कों पर उतरकर संघर्ष करेगी।”
धस्माना ने एलटी अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाया कि वो खुद बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा के साथ शिक्षा निदेशालय पहुंचकर धरने में शामिल होंगे।
युवाओं की टूटती उम्मीदें
ज्ञापन देने आए अभ्यर्थियों में गौरव नौटियाल, जोगेंद्र नाथ, रोहित आसवाल, बलदेव पंवार, रमेश पांडे, नरेंद्र सिंह, विवेक उनियाल, राधा भंडारी और आरती असवाल जैसे नाम शामिल थे। इन सभी की आंखों में बस एक ही सवाल था — “सरकार कब हमारी सुनेगी?”
पावरफुल क्लोजिंग लाइन (Closing Line)
सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं… सवाल उस भरोसे का है, जो इन युवाओं ने सिस्टम पर किया था। क्या ये भरोसा टूट जाएगा? या अब शुरू होगी असली जंग?
