सत्ता से जुड़े संगठन को कोरोना नही छूता तो इन्हें क्वॉरेंटाइन सेंटर सेवा में लगाएं – विजयपाल सजवाण पूर्व विधायक गंगोत्री

Share Now

उत्तरकाशी जिले में कोरोनावायरस के बढ़ते प्रकोप से चिंतित गंगोत्री के पूर्व विधायक और कांग्रेसी नेता विजयपाल सजवान ने प्रदेश में सत्ताधारी बीजेपी को संक्रमण फैलाने के लिए नियमों पर नियमों को ताक पर रखने का आरोप लगाया है। पूर्व विधायक विजयपाल सजवान ने कहा कि कोरोना वायरस को लेकर केंद्र द्वारा दी गई गाइडलाइंस में पुलिस, डॉक्टर्स, मीडिया आदि कुछ लोगों को कार्य विशेष के लिए छूट दी गई थी जबकि संक्रमण को देखते हुए इन कोरोना वारियर्स को भी नियमानुसार क्वॉरेंटाइन कराने के बाद ही समाज का हिस्सा बनाया गया है , किंतु सत्ता से जुड़े संगठन के लोग बेधड़क न सिर्फ नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं बल्कि आम लोगों के साथ बैठक कर संक्रमण फैलाने में सहयोग भी कर रहे हैं , उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में कानून की धाराएं सिर्फ गरीब और आम लोगों के लिए हैं? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि भाजपा संगठन के कार्यकर्ताओं को कोरोना नही छूता है तो उन्हें सार्वजनिक स्थलों पर घूमने की बजाय क्वॉरेंटाइन सेंटर में सेवा देनी चााहिये, इससे समाजसेवा का कार्य भी होगा और उनकी काबिलियत का उपयोग भी,


कांग्रेसी नेता ने बतायाा कि उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में से उत्त्तरकाशी में कुछ दिनों मे सबसे तेजी से कोरोना संक्रमण के मामले पुष्ट हुए है, ऐसे में जिला प्रशासन बहुत सख्ती से क्वारेंटीन और शोसल डिस्टेनसिंग का अनुपालन करवा रहे है। DM समेत पुलिस प्रशासन द्वारा कड़ी मेहनत कर जिले में प्रवेश करने वालों को 14 दिन के लिए क्वारेंटीन किया जा रहा है, संज्ञान में आया है कि बीते दिन जिले से कुछ अधिकारी बैठक के लिए देहरादून गए थे, जिनको भी प्रशासन ने एहतियातन क्वारंटीन किया हुआ है। लेकिन सत्ताधारी दल के कुछ नेता अपनी हलक में प्रशासन की मेहनत को पलीता लगा रहे है।

खबर के अनुसार भाजपा के नेता जी प्रदेश महामंत्री संगठन बीते दिनों देहरादून से (जो covid 19 के दृष्टिगत संवेदनशील है) उत्तरकाशी पहुंचे है। नियमानुसार इन्हें 14 दिनों के लिए क्वारेंटीन किया जाना था, लेकिन सत्ता के रौब में इन्होंने जनपद की सीमा में प्रवेश ही नही किया बल्कि चिन्यालीसौड़ मे कोरोना से बचाव की सामाग्री भी बांटी। और तो और इसके अगले ही दिन मुख्यालय स्थित पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी की।
अब सवाल ये है कि क्या सिर्फ आम आदमीयों के लिए ही ये क्वारंटीन की सुविधा की गई है? आखिर किस नियम के तहत इन महोदयों को बिना क्वारेंटीन खुली छूट दी गयी
? जहां आम लोगों को प्रशासन द्वारा कड़ी एहतियात बरतने की लगातार नसीहत दी जा रही है वही सत्तासीन नेताओं को बिना जांच और क्वारेंटीन के भेजा जा रहा है, जो संक्रमण फैलाने का संगीन जुर्म है। पिछले दिनों अनेक मामलों में जिला प्रशासन ने क्वारंटीन का उल्लंघन और संक्रमण फैलाने के जुर्म में IPC की बिभिन्न धाराओं के अंतर्गत कई लोगों पर मुकदमे भी दर्ज किए है। बहरहाल अब देखना ये होगा कि मामला प्रशासन के संज्ञान में आने के बावजूद इन माननीयों पर क्या कार्यवाही की जाती है?

इस संदर्भ में सरकारी पक्ष जानने के लिए एसडीएम डुंडा आकाश जोशी से दूरभाष पर संपर्क किया गया उन्होंने बताया कि डॉक्टर की रिपोर्ट के आधार पर कुछ लोगो को क्वॉरेंटाइन किया जा रहा है जबकि कुछ अन्य लोगों को डॉक्टर की ही रिपोर्ट पर बिना क्वॉरेंटाइन के छोड़ा भी जा रहा है, हालांकि ये कौन से मानक है जिनके आधार पर डॉक्टर्स को और डीएफओ को तो क्वॉरेंटाइन कराया गया, और अन्य को छोड़ा गया इसका खुलासा खुद एसडीएम भी नही कर सके।

error: Content is protected !!