काशीपुर
महामारी में कमाने का मौका मिला तो कोई पीछे नहीं रहा, जान बचाने का तमगा लिए कुछ डाक्टर भी इस बहती गंगा में हाथ धोने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पूरा नहा गए | महामारी के दौरान 35 हजार के इलाज के पीड़ित मरीज को 7 लाख भुगतान करना पड़ा | इस पर निजी अस्पताल के डाक्टर का जबाब तो सुनिए महाशय कहते है कोरोना काल में हमें भी कई गुना महंगी दरो पर सामान ख़रीदाना पड़ा था इसलिए इसे मरीज के बिल में जोड़ दिया गया |
हम बात कर रहे है काशीपुर के उस चर्चित आयुष्मान अस्पताल की जो आजकल मीडिया कि सुर्खियों में बना हुआ है | रोते बिलखते लोग महँगी दरो पर भुगतान करते रहे पर शिकायत के बाद भी प्रशासन सोया रहा | फिर एक पूर्व छात्र संघ के नेता के सोशल मीडिया पर वायरल विडियो ने वो धमाल मचाया कि प्रशासन को जाँच के लिए सामने आना पड़ा | बड़ा सवाल ये कि सामान्य तौर पर की गयी शिकायत को रद्दी की टोकरी में क्यों डाल दिया जाता है ?
निजी अस्पतालों की मनमानी थमने का नाम नही ले रही है और लगातार ही मरीजों से मनमाने पैसे वसूल कर निजी अस्पताल अपनी जेबें भर रहे है, इस ही एक मामला सामने आया है काशीपुर में जंहा एक निजी अस्पताल ने मरीज से सात लाख का बिल बनाकर थमा दिया, जिसके बाद मरीज ने किसी तरह से भुगतान तो किया लेकिन इसकी शिकायत भी प्रशासन को की जिसके बाद निजी अस्पताल में छापेमारी कर जांच शुरू कर दी है।
काशीपुर के आयुष्मान अस्पताल का ऐसा सच सामने आया जिसने पूरे प्रशासन को ही हिला कर रख दिया, यही नही जिसने भी सुना उसके हाथ पैर ही फूल गए| बिना भुगतान के मरीज को डिस्चार्ज तक नही किया गया, जी हाँ ये उसी आयुष्मान अस्पताल का ही ये मामला है जो आजकल मीडिया कि सुर्खियों में है | जहाँ सात लाख रूपये का बिल मरीज को चुकाना पड़ा, जबकि जिस इलाज के लिए मरीज से सात लाख रुपये लिए गए वो इलाज सरकारी आंकड़ों के हिसाब से महज 34200 में ही हो सकता था, स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोविड सेंटर के रूप में आयुष्मान अस्पताल को चयनित किया गया था, जिसके बाद से लगातार हिकोविड मरीजों से अधिक शुल्क लेने की शिकायतें भी मिल रही थी, वही प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल जांच शुरू कर दी है, और जांच के बाद कार्यवाही की बात कही है।
विपिन पंत….तहसिलदार
अमरजीत सिंह…नोडल अधिकारी
वहीं जब जांच शुरू हो गयी और स्वस्थ विभाग ने पूरे मामले को खंगालने शुरू किया तो निजी अस्पताल के डॉक्टर का बयान कुछ ऐसा था जिसे सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे, डॉक्टर साहब का कहना है कि कोरोना काल मे काला बाजारी की वजह से उनको उपकरण महंगे मिले जिससे उन्होंने उनकी कीमत भी मरीजों से ही वसूल ली।
विकास गहलोत… निजी अस्पताल डॉक्टर
