“सहकारिता से शहरी-ग्रामीण एकता” का भव्य उत्सव
देहरादून | 19 दिसंबर 2025
रेंजर्स ग्राउंड तैयार है… मंच सजा है… और सहकारिता की ताकत दिखाने के लिए देहरादून में 9 दिवसीय भव्य सहकारिता मेला शुरू होने जा रहा है। 20 से 28 दिसंबर तक, सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक, यह मेला बनेगा ग्रामीण मेहनत, शहरी बाजार और सांस्कृतिक वैभव का संगम।
🌾 जहां किसान, कारीगर और सहकारिता एक साथ
इस बार की थीम है — “सहकारिता से शहरी ग्रामीण एकता”। मतलब साफ है:
👉 गांव की मेहनत को शहर का बाजार
👉 स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान
👉 सहकारिता को नई ऊर्जा
मेले में स्थानीय सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह, किसान और काश्तकार अपने उत्पादों के साथ एक ही मंच पर नजर आएंगे। पहाड़ की खुशबू, खेतों की सच्चाई और उद्यमिता की उड़ान — सब कुछ एक जगह।
🏛️ प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद
जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में मेले को सफल बनाने के लिए जिला स्तरीय कार्यान्वयन समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह कर रहे हैं।
सीडीओ अभिनव शाह के अनुसार,
“संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2025 को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया गया है। इसी कड़ी में उत्तराखंड सरकार सहकारिता को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए यह थीम आधारित मेला आयोजित कर रही है।”
💡 हर दिन कुछ नया, हर सत्र खास
सहकारिता मेला सिर्फ खरीद-फरोख्त नहीं, बल्कि ज्ञान और नवाचार का केंद्र भी होगा।
हर दिन होंगे —
- 🔹 पैनल चर्चाएं और तकनीकी सत्र
- 🔹 निर्यात, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर प्रशिक्षण
- 🔹 युवा उद्यमिता और स्टार्टअप संवाद
- 🔹 किसान गोष्ठी, दुग्ध क्रांति, श्वेत क्रांति
- 🔹 डिजिटल साक्षरता, ई-कॉमर्स और वित्तीय समावेशन
- 🔹 महिला सशक्तिकरण पर विशेष सत्र
🎶 संस्कृति बोलेगी, परंपरा झलकेगी
शाम होते ही मेला बदलेगा रंग…
उत्तराखंड की लोक संस्कृति, संगीत, नृत्य और रंगारंग प्रस्तुतियां दर्शकों को बांधे रखेंगी। बच्चों के लिए झूले, परिवारों के लिए मनोरंजन और युवाओं के लिए प्रेरणा — सब कुछ एक साथ।
✨ सिर्फ मेला नहीं, एक आंदोलन
यह सहकारिता मेला सिर्फ आयोजन नहीं, बल्कि एक सोच है —
जहां शहर और गांव के बीच की दूरी घटेगी,
जहां सहकारिता बनेगी आत्मनिर्भर उत्तराखंड की पहचान।
**देहरादून तैयार है…
क्या आप तैयार हैं सहकारिता की इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनने के लिए?
