बडोनी शताब्दी वर्ष पर संवाद गोष्ठी, डॉ. प्रेम सिंह पोखरियाल हुए सम्मानित

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🌄 उत्तराखंड के गांधी को नमन, विचारों का महासंगम!


देहरादून |
जब विचार, संस्कृति और सेवा एक मंच पर मिलते हैं—
तो इतिहास सिर्फ याद नहीं किया जाता,
जिया जाता है।
उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले अमर बलिदानी रत्न श्री इंद्रमणि बडोनी के शताब्दी वर्ष पर देहरादून में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला।


🕊️ “उत्तराखंड – कल, आज और कल” पर गंभीर मंथन

4G मिशन सोसाइटी, देहरादून के तत्वावधान में आयोजित
भव्य विचार संवाद गोष्ठी
राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक भविष्य का आईना बन गई।

वक्ताओं ने सवाल भी उठाए,
और समाधान की दिशा भी दिखाई।


👩‍🦱 नारी सम्मान और संस्कृति का जीवंत उत्सव

गोष्ठी के अंतर्गत
देवी अहिल्याबाई होल्कर के योगदान पर चर्चा के साथ
नारी सम्मान समारोह आयोजित हुआ।

महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में
सांस्कृतिक वेश-भूषा प्रतियोगिता में भाग लिया।
लोक आभूषण, पहाड़ी अंदाज़ और आत्मविश्वास—
हर रंग में झलकी उत्तराखंड की आत्मा।


अटल जयंती और RSS शताब्दी से जुड़ा विशेष संदेश

25 दिसंबर का यह आयोजन
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती
और
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष
को समर्पित रहा।

राष्ट्र निर्माण, सामाजिक एकता और सेवा भाव
हर संवाद की धड़कन बने रहे।


🏥 सेवा का सम्मान: डॉ. प्रेम सिंह पोखरियाल

कार्यक्रम का भावुक और प्रेरक क्षण तब आया
जब जिला चिकित्सालय उत्तरकाशी के प्रमुख अधीक्षक
डॉ. प्रेम सिंह पोखरियाल
को
उनकी उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता और जनसेवा के लिए
सम्मानित किया गया।

वक्ताओं ने कहा—

“डॉ. पोखरियाल का कार्य स्वास्थ्य सेवाओं में
संवेदनशीलता और अनुशासन का आदर्श है।”


🗣️ सम्मान पाकर बोले डॉ. पोखरियाल

सम्मान ग्रहण करते हुए डॉ. पोखरियाल ने कहा—

“यह सम्मान मुझे और अधिक निष्ठा से
जनसेवा के लिए प्रेरित करेगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सामूहिक प्रयास ही
स्थायी बदलाव ला सकते हैं।”

उनके शब्दों में सेवा का संकल्प साफ झलका।


👥 समाज का हर वर्ग बना साक्षी

गोष्ठी में
समाजसेवी, शिक्षाविद, महिलाएं, युवा वर्ग
और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि
बड़ी संख्या में मौजूद रहे।


🔚 अंत में एक भाव…

इंद्रमणि बडोनी की विरासत,
अटल जी के विचार
और सेवा में लगे कर्मयोगियों का सम्मान—
यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था,
उत्तराखंड की आत्मा का उत्सव था।

**जब विचार जीवित रहते हैं,
तो पहाड़ भी भविष्य गढ़ते हैं।

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