🟥 ब्रेकिंग रिपोर्ट | जनभावनाओं पर डीएम की ‘जन-सुनवाई’ 🟥
🔴 जनता के बीच डीएम साहब!
देहरादून | 07 जुलाई 2025
मुख्यमंत्री की जननीतियों से प्रेरित होकर जिलाधिकारी सविन बंसल ने आज ऋषिपर्णा सभागार में लगाई इंसाफ की अदालत — “जनता दर्शन”।
जहां बुजुर्गों, महिलाओं, किसानों और बेरोजगारों की आवाज़ न केवल सुनी गई, बल्कि तुरंत कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए गए।
👩🦳 बुज़ुर्ग माँ से बेटी ने छीना घर, डीएम ने दिलाया न्याय
राजेश्वरी देवी, 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला—60% दिव्यांग—की आँखों में आँसू थे।
“मेरी शादीशुदा बेटी ने मेरे ही मकान पर कब्जा कर लिया, अब मुझे बेघर कर रही है,” वह कांपती आवाज़ में बोलीं।
डीएम ने बिना देर किए एसडीएम (न्याय) को निर्देश दिए:
“बुज़ुर्ग को कब्जा लौटाओ, ये न्याय का सवाल है, संवेदनशीलता दिखाओ।”

🧑🌾 86 साल का किसान, जमीन के लिए भटकता रहा… अब मिले आदेश!
प्रीतम सिंह, सिमलासग्रांट निवासी वृद्ध किसान, बोले:
“कोर्ट ने हमें इंसाफ दिया, लेकिन विरोधी कब्जा नहीं छोड़ रहा।”
डीएम ने एसडीएम डोईवाला को आदेश दिए:
“7 दिन में अद्यतन कार्यवाही करके रिपोर्ट दो।”
🧕 पति की मौत के बाद नौकरी के लिए दर-दर भटकी रेनू, अब मिलेगा अधिकार!
रेनू, नगर निगम में कार्यरत अपने दिवंगत पति की जगह नौकरी मांगती आई।
फाइलों में एक अभिलेख की कमी निकली।
डीएम ने अफसरों को फटकारते हुए कहा:
“2 दिन में अभिलेख बनाओ और नौकरी की प्रक्रिया शुरू करो।”
🌧️ बरसाती पानी ने घर को किया तबाह, अब नगर निगम को चेतावनी!
गौरी रानी, करनपुर निवासी, कहती हैं:
“सड़क ऊँची बना दी, बारिश का पानी घर में भरता है, सब बर्बाद हो गया।”
डीएम सख्त हुए:
“1 हफ्ते में समाधान नहीं हुआ तो विभागीय कार्रवाई होगी!”
🎓 बेटी की पढ़ाई के लिए मां ने लगाई गुहार, नंदा-सुनंदा योजना से मदद तय
अनिता, रानीपोखरी की मां, बेटी की B.Sc. IT की पढ़ाई के लिए 75,000 की फीस नहीं जुटा पाईं।
“बेटी पढ़ेगी तो ही आगे बढ़ेगी,” उनकी आंखों में उम्मीद थी।
डीएम ने CDO को निर्देश दिए:
“नंदा-सुनंदा योजना से तत्काल सहायता करें।”
🔍 डीएम की दो टूक चेतावनी – फरियादियों को दौड़ाने वालों की होगी खैर नहीं!
डीएम सविन बंसल ने सख्त लहजे में कहा:
“जो अधिकारी जानबूझकर फाइल घुमाते हैं, वे समझ लें—अब जनता को परेशान करने की कीमत चुकानी पड़ेगी!”
⚖️ कानून से न्याय, संवेदना से समाधान!
जनता दर्शन में 125 शिकायतें आईं—जमीन, बिजली, कानून, शिक्षा, महिला उत्पीड़न, और रोज़गार से जुड़ी।
प्रत्येक मामले में तुरंत एक्शन लिया गया। डीएम ने खुद कागजात देखे, हर शिकायत को गंभीरता से सुना।
🔚 आखिरी पंक्ति – प्रशासन अब “कागज़ी नहीं, मानवीय” है!
इस जनता दर्शन में एक बात साफ़ हो गई—
यह दौर अब “फ़ाइलों के नीचे दबी आवाज़ों” का नहीं, बल्कि “हर फरियादी की सुनवाई” का है।
👁️🗨️ अब जनता देख रही है, और प्रशासन जवाब दे रहा है!
📢 यही है नई प्रशासनिक नीति – जवाबदेही, संवेदना और एक्शन!
