देहरादून में प्रशासन का बुलडोज़र चला मोबाइल टावरों पर! बिना इजाज़त लगे दर्जनों टावर सील — “जनभावना से खिलवाड़ नहीं सहेंगे”

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घनी बस्तियों में हाई फ्रीक्वेंसी टावर से डरे लोग, DM बोले — “कानून तोड़ोगे तो विध्वंस तय!”


ओपनिंग पैरा

“लोहे के ढांचे पर लगे एंटेने हवा में झूल रहे थे… और नीचे खड़ा प्रशासन कह रहा था — ‘जनता से खिलवाड़ की कोई छूट नहीं!’ देहरादून में एक झटके में दर्जनों मोबाइल टावर सील कर दिए गए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन का ये ‘फ्रंटफुट एक्शन’ लोगों में खौफ और राहत दोनों लेकर आया है।”


📝 मुख्य स्क्रिप्ट

देहरादून के विकासनगर, बहादरपुर सेलाकुई, और हरबर्टपुर की तंग गलियों में पिछले कुछ महीनों से गुपचुप हाई फ्रीक्वेंसी मोबाइल टावर खड़े हो रहे थे। न नक्शा पास, न अनुमति… बस लोहे के खंभे और एंटेने।

लोग परेशान थे। किसी की मां को सिरदर्द, किसी के बच्चे को नींद नहीं आ रही थी। डर था — रेडिएशन का।


शिकायतों का अंबार लग गया। लोग कहने लगे:

“हमारे सिर पर मौत खड़ी कर दी है इन टावरों ने… सरकार ही हमारी उम्मीद है।” – विकासनगर के रामचंद्र सिंह


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश पर जिलाधिकारी सविन बंसल की टीम मैदान में उतरी। एक के बाद एक मोबाइल टावरों पर लाल पट्टी लहराई — सील कर दिया गया।


डीएम सविन बंसल बोले:

“हमारे जिले में जनभावना से खिलवाड़ और नियमविरुद्ध कामों का हश्र सिर्फ एक ही है — विध्वंस। चाहे छोटी सी खूंटी ही क्यों न गाड़ी हो, बिना अनुमति सब सील होगा।”


वार्ड नंबर 5 रामबाग हरबर्टपुर और बहादरपुर सेलाकुई राजावाला रोड में लोगों की सांस में जैसे चैन आया। बुजुर्ग गोविंद प्रसाद कहते हैं:

“हमारे बच्चों की सेहत का सवाल था। आज प्रशासन ने दिल जीत लिया।”


क्लोजिंग लाइन:

देहरादून की गलियों में आज सबक साफ गूंज रहा है — जनभावना के खिलाफ खड़ी कोई भी दीवार ज्यादा दिन टिक नहीं सकती। सवाल यही है — क्या ये सख्ती हमेशा कायम रहेगी?

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