देहरादून। अखिल गढ़वाल सभा द्वारा गढ़वाली लोकसंगीत के जनक स्व. जीत सिंह नेगी के निधन से व्यथित होकर सभा भवन में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। अपने भाव रखते हुए सभा अध्यक्ष रोशन धस्माना ने कहा कि स्व. जीत सिन्ह नेगी हमारी गढ़वाली लोकसंस्कृति के पुरोधा रहे हैं। वे एक बहुत श्रेष्ठ लेखक, गायक, व कवि होने के साथ साथ एक उच्च कोटि के निर्देशक भी थे। मलेथा की गूल, रामी बौराणी, राजू पोस्टम्सन जैसे उनके अनगिनत नृत्य नाटकों में लोकगीतों और लोकनृत्यों के माध्यम से अपनी लोकसंस्कृति का अद्धभुत समावेश था। महासचिव गजेंदर भंडारी ने कहा कि स्व नेगी जी उतराराखंडी के सहगल के कहे जाते थे। उत्तराखंड की संस्कृति के वे एक ऐसे कोहिनूर हैं जो अपनी कृतियों से लोकसंस्कृति में प्रकाश और चमक फैलाते रहेंगे अपने महाप्रयाण के बाद भी। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी के लीये वे अपनी थाती सौम्प गए हैं, जिसे हमने आगे बढ़ना है।।सांस्कृतिक सचिव पंडित उदय शंकर भट्ट जी ने कहा कि अब आवश्यकता है कि हम गढ़वाल सभा और गढ़वाली समाज के माध्यम से उनके कार्यों को आगे बढ़ाएं। वे अपनी बोली भाषा और लोकसंस्कृति के लिए पूरी हमे एक विरासत सौम्प गए हैं। 96 वर्ष की आयु में भी वे चिंतनशील रहते थे। लोकगायिका संगीता ढोंडियाल ने भावुक होकर कहा कि स्व जीत सिंह जी मेरे गुरु रहे। मेरा सौभाग्य है कि मैंने लोकसंगीत की शिक्षा उन्ही से ली और और उनके साथ मलेथा की गूल जैसी अनेकों प्रस्तुतियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मलेथा की गूल और रामी बौराणी जैसे अनेक स्वयं लिखे व निर्देशित नाटकों को मंचन पूरे देश भर में हुआ और सराहा गया। संगीता ने कहा कि वे लोकसंस्कृति के ऐसे वटवृक्ष थे जिनके छाया में उनसे बहुत कलाकारों ने संगीत सीखा। प्रचार सचिव अजय जोशी ने कहा कि ग्रामोफोन में रिकॉर्डिंग करने वाले पहले गढ़वाली गायक थे, और उनकी रचनाएं उनको सिर्फ उत्त्तराखण्ड ही नही अपितु समस्त देश के सर्वश्रेष्ठ लोक कलाकारों में शुमार करती है। वे अपने कार्यों से उत्त्तराखण्ड के लोकसंस्कृति जगत में अमर हो गए हैं। उनका निधन उतराराखंडी लोकसंस्कृति के लिये एक भारी क्षति है। ईश्वर उन्हें अपने चरणों मे स्थान दे। इस अवसर पर उपाध्यक्ष निर्मला बिष्ट कोषाध्यक्ष वीरेंद्र असवाल, सहसचिव संतोष गैरोला, प्रबंध सचिव बीरेंद्र असवाल, संगठन सचिव कत सूर्य प्रकाश भट्ट, कार्यकारिणी सदस्य दिनेश बौराई, सदस्य मुकेश सुंद्रियाल दीपक रावत आदि उपस्थित रहे।
