सर्विस ट्रिब्युनल के न्यायाधीशों के लिये पहली बार हुये आवेदन आमंत्रित

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देहरादून। सरकारी कर्मचारियों के सेवा सम्बन्धी मामलों का फैसला करने वाले प्रदेश के सर्वोच्च न्यायालय लोक सेवा अधिकरण (सर्विस ट्रिब्युनल) में न्यायाधीशों के पद योग्य उम्मीदवारों के आवेदन के इंतजार में लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। उत्तराखंड में इन न्यायिक अधिकारियों के पदों पर बिना किसी आवेदन आमंत्रण के सीधे शासन को आवेदन प्रेषित करने पर ही नियुक्तियां होती रही है। इनमें से नियुक्त 4 अधिकारी तो पूर्व में नियुक्ति की कार्यवाही करने वाले शासन के न्याय विभाग के प्रमुख रह चुके है। सूचना अधिकार से यह खुलासा होने तथा नदीम उद्दीन द्वारा इस सम्बन्ध में राज्यपाल को ज्ञापन प्रकाशित करने के उपरान्त पहली बार सर्विस ट्रिब्युनल के न्यायाधीशों (उपाध्यक्ष व सदस्य) के लिये समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करके आवेदन आमंत्रित किये गये है। सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने उत्तराखंड शासन के न्याय विभाग के लोक सूचना अधिकारी से लोक सेवा अधिकरण के न्यायाधीशोें (उपाध्यक्ष, सदस्यों) के रिक्त पदों तथा उनकी नियुक्ति हेतु कार्यवाही सम्बन्धी सूचना मांगी। इसके उत्तर में उत्तराखंड शासन के न्याय अनुभाग-1 के लोक सूचना अधिकारी/अनुभाग अधिकारी बसन्त बल्लभ जोशी ने अपने पत्रांक 62 से सूचना उपलब्ध करायी है।
श्री नदीम को उपलब्ध सूचना के अनुसार उत्तराखंड लोक सेवा अधिकरण के उपाध्यक्ष (प्रशा.), सदस्य (न्यायिक) एवं सदस्य (प्रशा0) के एक-एक- पद है जो रिक्त हैं। सदस्य (न्यायिक) का पद 06-08-2010 से तथा सदस्य (प्रशा0) का पद 01-08-2021 से रिक्त है। उपाध्यक्ष (प्रशा.) का पद भी सितम्बर 2023 में कार्यकाल समाप्त होने पर रिक्त हो गया है। श्री नदीम को उपलब्ध सूचना के अनुसार लोक सेवा अधिकरण में उपाध्यक्ष (प्रशानिक) एवं सदस्य (प्रशासनिक/न्यायिक) के रिक्त पदों पर नियुक्ति हेतु विज्ञप्ति प्रकाशित करते हुये आवेदन पत्र आमंत्रित किये गये है। जिसकी अंतिम तिथि 05-12-2023 है। योग्य आवेदकों के आवेदन प्राप्त होने पर नियुक्ति की कार्यवाही की जायेगी।
श्री नदीम को महानिदेशक सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग, उत्तराखंड के उपनिदेशक रवि विजारनियां के पत्रांक 83 की फोटो प्रति भी विज्ञापन वाले समाचार पत्रों की कटिंग के साथ उपलब्ध करायी है। श्री नदीम को पूर्व में उपलब्ध सूचना के अनुसार इससे पूर्व तक उत्तराखंड लोक सेवा अधिकरण में सदस्य (न्या0/प्रशा0) के पद पर नियुक्ति हेतु कोई कार्यवाही नहीं की गयी हैं क्यांेकि किसी भी योग्य अभ्यर्थी द्वारा उक्त पद पर नियुक्ति हेतु आवेदन शासन में प्रेषित नहीं किया गया है।
श्री नदीम को उपलब्ध सूचना से स्पष्ट है कि शासन के संबंधित विभाग (न्याय विभाग) को प्रेषित व्यक्तिगत आवेदनों पर ही लोक सेवा अधिकरण में न्यायधीशों के रूप में फैसला करने वाले अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्तियां की जाती रही है। इसमें से 4 उन अधिकारियों की नियुक्तियां की गयी है जो पूर्व में नियुक्ति की कार्यवाही करने वाले न्याय विभाग के ही मुखिया (प्रमुख सचिव/सचिव) रहे हैं। इसमें 3 तो अपनी नियुक्ति के ठीक पहले ही इसके पदों पर कार्यरत रहे हैं। शासन तथा लोक सेवा अधिकरण से सूचना प्राप्त होने के उपरान्त टैक्स सी.एच.आर.बार. एसोसिएशन के अध्यक्ष नदीम उद्दीन ने राज्यपाल को दिनांक 09 अक्टूबर 23 को प्रेषित ज्ञापन में माननीय सुप्रीम कोर्ट के बिना विज्ञापन प्रकाशित कराये लोक पदों पर नियुक्तियों को सम्बन्धित योग्य उम्मीदवारों के अनुच्छेद 14 तथा 16 में गारंटीकृत मूल अधिकारों का उल्लंघन मानने सम्बन्धी निर्णयों को संदर्भित करते हुये विज्ञापन प्रकाशित कराकर हिन्दी में कार्य करने को सक्षम योग्य उम्मीदवारों के उपाध्यक्ष व सदस्यों के पदों पर यथाशीघ्र नियुक्ति करने का निवेदन दिया था। इसके उपरान्त ही लोक सेवा अधिकरण के उपाध्यक्ष व सदस्य के पदों के लिये पहली बार विज्ञापन प्रकाशित हुये हैं।

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