उत्तरकाशी में गूंजा जागरूकता का बिगुल! — 36 न्याय पंचायतों में चला एक दिवसीय आपदा सुरक्षा अभियान

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🌄 सबहेडलाइन:
भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन से निपटने की मिली प्रायोगिक ट्रेनिंग — बच्चों से बुजुर्ग तक सीखे आपदा से बचाव के गुर
SDRF, वन विभाग, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन की संयुक्त टीमों ने किया बेहतरीन प्रदर्शन


🔥 ओपनिंग (भावनात्मक और प्रभावी शुरुआत):
हिमालय की गोद में बसे उत्तरकाशी ज़िले में आज सुरक्षा का पाठ पढ़ा गया —
न किसी स्कूल में, न किसी किताब से, बल्कि ज़मीनी अभ्यास और व्यवहारिक प्रशिक्षण से!
जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) उत्तरकाशी के तत्वावधान में आयोजित इस अभियान ने लोगों को सिखाया — “आपदा नहीं, तैयारी ही बचाव है।”


🏔️ प्रशिक्षण का विस्तार:
इस एक दिवसीय जन-जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जनपद की 36 न्याय पंचायतों में किया जा रहा है।
कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन विभाग, वन विभाग, SDRF, अग्निशमन, स्वास्थ्य विभाग और जिला विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीमें शामिल रहीं।
संपूर्ण प्रशिक्षण का नेतृत्व आपदा प्रबंधन मास्टर ट्रेनर एवं क्यूआरटी टीम ने किया।


📍 10 नवम्बर की प्रमुख गतिविधियाँ:
शनिवार, 10 नवम्बर को कार्यक्रम गेवला भण्डारस्यूं (160 प्रतिभागी), नन्दगांव (101 प्रतिभागी) और नौगांव विकासखंड में आयोजित हुआ।
हर स्थान पर ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।


🧭 क्या सिखाया गया:
संयुक्त टीमों ने सभी प्रतिभागियों को सिखाया —

  • भूकंप से पहले, दौरान और बाद में बरती जाने वाली सावधानियाँ
  • बाढ़ और भूस्खलन से निपटने के उपाय
  • आपदा के समय खोज एवं बचाव उपकरणों का उपयोग
  • तात्कालिक स्ट्रेचर निर्माण तकनीक
  • सैटेलाइट फोन के प्रयोग की विधि
  • घरेलू एवं वनाग्नि से बचाव के तरीके
  • भूकंप रोधी भवन निर्माण तकनीक
  • प्राथमिक उपचार (First Aid) और CPR की प्रक्रिया

इन सबका प्रायोगिक प्रदर्शन भी现场 (मैदान में) किया गया, ताकि हर प्रतिभागी सिर्फ सुने नहीं, बल्कि खुद करके सीखे।


📚 जनता तक पहुंची जागरूकता:
कार्यक्रम के दौरान जन-जागरूकता पंपलेट्स वितरित किए गए।
लोगों को भूदेव मोबाइल ऐप डाउनलोड कर इसके प्रयोग की जानकारी दी गई — जिससे आपदा के समय सूचना और सहायता तुरंत प्राप्त की जा सके।


💬 एक अधिकारी ने कहा:

“उत्तरकाशी जैसे संवेदनशील ज़िले में हर नागरिक का जागरूक होना बेहद जरूरी है।
जब जनता तैयार होती है, तो कोई भी आपदा बड़ी नहीं रह जाती।”


🏞️ स्थानीय रंग और भावना:
पर्वतीय गांवों में जब बच्चों ने स्ट्रेचर बनाना सीखा, महिलाएँ CPR का अभ्यास करने लगीं, और बुजुर्गों ने आपदा के वक्त राहत उपकरणों को छुआ —
तो लगा जैसे पूरा उत्तरकाशी सजगता की नई दिशा में कदम बढ़ा रहा है।


✨ समापन (प्रेरक अंत):
उत्तरकाशी की पहाड़ियों में गूंजा एक संदेश —
“आपदा आएगी तो डर नहीं, क्योंकि तैयारी है हमारी ढाल।”
आज की यह पहल केवल एक प्रशिक्षण नहीं,
बल्कि सुरक्षित उत्तराखंड की नींव रखने वाला कदम है।

उत्तरकाशी में गूंजा जागरूकता का बिगुल! — 36 न्याय पंचायतों में चला एक दिवसीय आपदा सुरक्षा अभियान


🌄 सबहेडलाइन:
भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन से निपटने की मिली प्रायोगिक ट्रेनिंग — बच्चों से बुजुर्ग तक सीखे आपदा से बचाव के गुर
SDRF, वन विभाग, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन की संयुक्त टीमों ने किया बेहतरीन प्रदर्शन


🔥 ओपनिंग (भावनात्मक और प्रभावी शुरुआत):
हिमालय की गोद में बसे उत्तरकाशी ज़िले में आज सुरक्षा का पाठ पढ़ा गया —
न किसी स्कूल में, न किसी किताब से, बल्कि ज़मीनी अभ्यास और व्यवहारिक प्रशिक्षण से!
जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) उत्तरकाशी के तत्वावधान में आयोजित इस अभियान ने लोगों को सिखाया — “आपदा नहीं, तैयारी ही बचाव है।”


🏔️ प्रशिक्षण का विस्तार:
इस एक दिवसीय जन-जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जनपद की 36 न्याय पंचायतों में किया जा रहा है।
कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन विभाग, वन विभाग, SDRF, अग्निशमन, स्वास्थ्य विभाग और जिला विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीमें शामिल रहीं।
संपूर्ण प्रशिक्षण का नेतृत्व आपदा प्रबंधन मास्टर ट्रेनर एवं क्यूआरटी टीम ने किया।


📍 10 नवम्बर की प्रमुख गतिविधियाँ:
शनिवार, 10 नवम्बर को कार्यक्रम गेवला भण्डारस्यूं (160 प्रतिभागी), नन्दगांव (101 प्रतिभागी) और नौगांव विकासखंड में आयोजित हुआ।
हर स्थान पर ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।


🧭 क्या सिखाया गया:
संयुक्त टीमों ने सभी प्रतिभागियों को सिखाया —

  • भूकंप से पहले, दौरान और बाद में बरती जाने वाली सावधानियाँ
  • बाढ़ और भूस्खलन से निपटने के उपाय
  • आपदा के समय खोज एवं बचाव उपकरणों का उपयोग
  • तात्कालिक स्ट्रेचर निर्माण तकनीक
  • सैटेलाइट फोन के प्रयोग की विधि
  • घरेलू एवं वनाग्नि से बचाव के तरीके
  • भूकंप रोधी भवन निर्माण तकनीक
  • प्राथमिक उपचार (First Aid) और CPR की प्रक्रिया

इन सबका प्रायोगिक प्रदर्शन भी现场 (मैदान में) किया गया, ताकि हर प्रतिभागी सिर्फ सुने नहीं, बल्कि खुद करके सीखे।


📚 जनता तक पहुंची जागरूकता:
कार्यक्रम के दौरान जन-जागरूकता पंपलेट्स वितरित किए गए।
लोगों को भूदेव मोबाइल ऐप डाउनलोड कर इसके प्रयोग की जानकारी दी गई — जिससे आपदा के समय सूचना और सहायता तुरंत प्राप्त की जा सके।


💬 एक अधिकारी ने कहा:

“उत्तरकाशी जैसे संवेदनशील ज़िले में हर नागरिक का जागरूक होना बेहद जरूरी है।
जब जनता तैयार होती है, तो कोई भी आपदा बड़ी नहीं रह जाती।”


🏞️ स्थानीय रंग और भावना:
पर्वतीय गांवों में जब बच्चों ने स्ट्रेचर बनाना सीखा, महिलाएँ CPR का अभ्यास करने लगीं, और बुजुर्गों ने आपदा के वक्त राहत उपकरणों को छुआ —
तो लगा जैसे पूरा उत्तरकाशी सजगता की नई दिशा में कदम बढ़ा रहा है।


✨ समापन (प्रेरक अंत):
उत्तरकाशी की पहाड़ियों में गूंजा एक संदेश —
“आपदा आएगी तो डर नहीं, क्योंकि तैयारी है हमारी ढाल।”
आज की यह पहल केवल एक प्रशिक्षण नहीं,
बल्कि सुरक्षित उत्तराखंड की नींव रखने वाला कदम है।

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