ब्रह्म कुमारी प्रजापिता ईश्वरीय विश्व विद्यालय मसूरी शाखा ने मनाया महिला दिवस

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मसूरी। ब्रह्म कुमारी प्रजापिता ईश्वरीय विश्व विद्यालय मसूरी शाखा में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसका शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर कु. शिवन्या ने मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति की व अंत में प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम में पहुचने पर मुख्य अतिथि व अतिथियों को गुलदस्ता व पटका भेंट कर स्वागत किया गया। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने सभी महिलाओं को महिला दिवस की ेशुभकामनाए दी व कहा कि कहा कि आज का दिन महिलाओं के राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व संस्था जो संदेश समाज को देती है वह बहुत अहम है। उन्होंने आर्थिक भूमिका को मनाने का दिन है, बिना महिला के समाज की कल्पना नहीं की जा सकती, महिला व पुरूष एक दूसरे के पूरक होते है, समाज इन्ही से बनता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए हर दिन महिला दिवस है, घर के अंदर संघर्ष, बाहर संघर्ष, समाज के भीतर साथ चलने का संघर्ष रहता है। कई ऐसी महिलाएं रही है जिन्होंने पति व पुत्र के न होने पर भी समाज में नाम कमाया, राज किया, बिना संघर्ष के कोई कामयाबी नहीं मिल सकती। महिलाओं को घर के साथ ही बाहर कार्य करना होता है व लौट कर घर संभालना पडता है। यह आम आदमी नहीं कर सकता। हर पल चुनौतियों का सामना कर आगे बढती है यह महिला सशक्तिकरण से संभव है। भारत में महिलाओं की स्थिति थोडा भिन्न है जहां तानों बानों के बीच के संघर्ष से लड़कर आगे बढती है। महिला के हाथ में वो शक्ति है जो परिवार को डुबा सकती है व उसे आगे बढा सकती है। घर से ही महिला बच्चों को संस्कार देती है जो उनके बाहर जाने पर काम आते है, ऐसे में मां बाप की चिंंता कम रहती है। अगर संस्कार अच्छे न हो तो वह आगे नहीं बढ सकता। महिलाओं में वो शक्ति है व स्वंय अपनी भूमिका तय कर सकती है। इस मौके पर देहरादून से आयी जोन प्रभारी बीके मंजू दीदी ने कहा कि पूरे विश्व में महिलाओं ने जिस तरह से नाम कमाया है उसके फलस्वरूप यूएनओ ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया। महिलाओं ने समाज को बहुत कुछ दिया है व दे रही हैं लेकिन अपने को कमजोर महसूस कर रही है, ऐसे में महिलाओं को अपनी महत्ता को समझना होगा, ईश्वर ने नारी शक्ति को सृष्टि का आधार बनाया है, उनकी कमजोरी का समाज लाभ उठा रहा है, ऐसे में हमें सशक्त होना होगा, अपनी सोयी शक्ति को जगाना होगा, नारी देवी, लक्ष्मी का रूप है उन्हें समाज की कुरीतियों व बुराइयों का अंत करना होगा भगवान ने भी राक्षसों के वध के लिए दुर्गा को आगे किया था, समाज को सुधारना है तो बदलाव लाना होगा और पहले स्वयं को बदलना होगा, जीवन को चरित्रमय बनाओ, अपनी भावना को शुद्ध रखो तो कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, अच्छी सोच रखो, इसी लिए हमारे देश में वंदे मातरम, व भारत माता को सर्वोच्च माना गया है। अपनी खोयी शक्ति को जगाना है, मन को स्वच्छत व स्वथ्य रखने के लिए राजयोग करें। इस मौके पर बीके वर्षा ने कहा कि सृष्टि में परिवर्तन की शक्ति मातृशक्ति मे है। प्यार व संयम को अपनाये, माताएं अगर अपनी शक्ति को पहचाने, तो परिवार सक्षम हो सकता है। सहनशीलता व त्याग बड़ी शक्ति है, समाज व परिवार को सशक्त बनाने के लिए महिलाओं की अहम भूमिका है। वंदे मातरम, व स्वर्णिम भारत तभी बन सकता है जब महिलाओं का सम्मान होगा। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी, जोन प्रभारी वीके मंजू दीदी, विके विनिता, वीके वर्षा, वीके किरन, प्रमिला नेगी, विनीता तेलवाल, सुशीला सहित बडी संख्या में महिलाएं मौजूद रही।

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