🌿 हरी चुनरियों में बिखरा तीज का रंग: देहरादून में मातृशक्ति ने रचा सांस्कृतिक इतिहास
11 कीर्तन मंडलियों की सजीव प्रस्तुति, सौंदर्य प्रतियोगिता में झलकी नारी गरिमा, तीज बना सशक्तिकरण का प्रतीक

🎤 जहां हर सांस में था संगीत, हर रंग में थी शक्ति…
देहरादून का मोथरोवाला स्थित श्रेष्ठ वेडिंग पॉइंट रविवार को एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक उत्सव का गवाह बना। केदार नगर मंडल, धर्मपुर विधानसभा द्वारा आयोजित तीज महोत्सव में जब 11 कीर्तन मंडलियां मंच पर उतरीं, तो पूरा पंडाल तालियों और भक्ति रस से गूंज उठा।
हरे रंग की साड़ियों में सजी, माथे पर बिंदी और हाथों में मेंहदी रचाए महिलाओं ने सिर्फ त्योहार नहीं मनाया — बल्कि संस्कृति, श्रद्धा और स्वाभिमान का एक रंगीन जुलूस रचा।

🏆 कीर्तन प्रतियोगिता: भक्ति में बसी प्रतिस्पर्धा
कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण रही कीर्तन मंडलियों की प्रतियोगिता, जिसमें शामिल हुईं बंजारावाला और मोथरोवाला क्षेत्र की नामचीन टीमें।
- 🥇 प्रथम पुरस्कार: धरोहर कीर्तन मंडली को ₹5100 और स्मृति चिन्ह
- 🥈 द्वितीय पुरस्कार: शीतला माता कीर्तन मंडली, ₹3100
- 🥉 तृतीय पुरस्कार: नवदुर्गा कीर्तन मंडली (सैनिक कॉलोनी), ₹2100
- 🎖️ परामर्श पुरस्कार: दुर्गा कीर्तन मंडली, ₹1100
👑 तीज क्वीन बनीं नारी गरिमा की प्रतीक
महिलाओं के सौंदर्य और आत्मविश्वास का मंच बना तीज क्वीन प्रतियोगिता, जिसमें दो आयु वर्गों की मातृशक्ति ने भाग लिया:
- प्रथम वर्ग: 18-35 वर्ष
- द्वितीय वर्ग: 35-50 वर्ष
हरे रंग की परंपरा को निभाते हुए सभी प्रतिभागी – हरे ब्लाउज, हरी साड़ी, हरी नेलपॉलिश और बिंदी में पूरी तरह से प्रकृति से सामंजस्य साधे दिखाई दीं।

💬 “महिलाओं को भी चाहिए खुद के लिए वक्त”: आयोजन की भावनात्मक पुकार
कार्यक्रम का संचालन कर रहीं केदार मंडल अध्यक्ष सरिता लिंगवाल ने कहा:
🗣️ “हर दिन घर-परिवार के काम में लगी महिलाएं जब मंच पर उतरती हैं, तो हमें याद आता है कि उन्हें भी खुद के लिए थोड़ा समय, थोड़ी सराहना और बहुत सारा आत्मसम्मान चाहिए। तीज महोत्सव उन्हें यही देता है — खुद को जीने का एक दिन।”
मुख्य अतिथि विधायक विनोद चमोली ने भी कहा:
🗣️ “ऐसे आयोजन न सिर्फ हमारी संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि महिलाओं के आत्मबल और नेतृत्व क्षमता को भी सामने लाते हैं।”
🌸 तीज: सिर्फ एक व्रत नहीं, एक एहसास है
इस आयोजन ने यह साफ कर दिया कि तीज सिर्फ व्रत और श्रृंगार का पर्व नहीं, बल्कि वह आत्मबल, प्रेम और परंपरा का ऐसा संगम है, जहाँ हर स्त्री अपने भीतर की देवी से जुड़ती है।
✨ अंतिम पंक्ति – सोचने को मजबूर करती है…
“जिस समाज की महिलाएं मुस्कुराना भूल जाएं, वहां त्योहार नहीं बचते — और जहां नारी गाती है, नाचती है, वहां संस्कृति अमर होती है।”
