उलझ गए हरदा : उत्तराखंड के भड्डु मे दाल गल नहीं रही वही पंजाब का प्रेशर कूकर सीटी पर सीटी मारे जा रहा है

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उत्तराखंड मे बीजेपी के सीएम के बदलने पर चुस्की लेने वाली कॉंग्रेस खुलकर दांत भी नहीं दिखा पा रही है | सीएम बदलने को लेकर बीजेपी की अंदरूनी गुटबाजी को लेकर आक्रामक कॉंग्रेस खुद के किले मे उलझी हुई है | महिला नेत्री इन्दिरा हरिदेश के निधन के बाद खाली हुई नेता बिपक्ष की सीट को लेकर मचा घमासान पीसीसी चीफ़ की कुर्सी तक पहुचा | खबरे उडी की प्रीतम को नेता विपक्ष बनाया जा सकता है तो प्रदेश अध्यक्ष की सीट के लिए सतरंज की गोटिया सज गयी अपने अपने पक्ष मे समीकरण दिये जाने लगे | इधर एक पद छोडने की स्थिति मे प्रदेश कॉंग्रेस के दोनों दिग्गज हरीश रावत और प्रीतम सिंह खाली सीट पर अपने समर्थको को रखने की शर्त पर अड़ गए तो आला कमान कोई भी फैसला नहीं कर सका | दरअसल बचे खुचे प्रदेसों मे किसी तरह खुद को जिंदा रखे हुए कॉंग्रेस आज पुराने जैसी आदेश देने की  स्थिति मे भी  नहीं है कि एक तरफा फैसला कर ले और कोई शोर भी न हो,  हालांकि बीजेपी अब इस दौर मे जरूर पहुच गयी है जहा कब क्या हो जाय कोई सवाल खड़ा नहीं कर सकता | उत्तराखंड मे पहली बार बने विधायक को सीएम की गद्दी मिल सकती है तो पार्टी मे कुछ भी संभव है कई आवाज नहीं करेगा |

उत्तराखंड मे एक चेहरे पर चुनाव लड़ने की मांग करने वाले हरीश रावत का प्रीतम गुट विरोध कर रहा है वही आला कमान ने हरदा को पंजाब की लड़ाई मे उलझा कर रख दिया है | इधर राजनीति मे वयस्क हो चुके किशोर उपाध्याय भी दोनों की लड़ाई के बीच दुबारा पीसीसी चीफ़ की गद्दी का रास्ता निकालने की फिराक मे है |     

पंजाब मे दो नेताओं के बीच काफी समय से जारी वर्चस्व की जंग में हरीश रावत बुरी तरह उलझ कर  रह गए हैं। कई कोशिशें करने के बाद भी अब इन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि इन दोनों नेताओं के बीच सुलह कैसे कराएं ? हरदा अब किसी भी बहाने अपने प्रदेश की राजनीति मे लौटने के लिए अपना बिस्तर बांध कर तैयार बैठे है, लेकिन अभी कुछ दिनों तक इन्हें और इंतजार करना पड़ सकता है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत  पिछले काफी समय से अपने गृह राज्य की राजनीति को संभालने के लिए आलाकमान से कई बार गुहार लगा चुके हैं। लेकिन हाईकमान ने इनको दूसरे राज्य का मामला सुलझाने के लिए लगा रखा है। ‘पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस के नेता नवजोत सिद्दू का मनमुटाव ही हरीश रावत को उत्तराखंड आने नहीं दे रहा है’। कई दिनों से हरीश रावत कभी अमरिंदर सिंह से तो कभी सिद्धू से बात करते हैं लेकिन अभी तक दोनों के संबंधों में मिठास नहीं आ पाई है। ‌गुरुवार को कांग्रेस आलाकमान से मिलने के बाद खबरें आई थी कि कैप्टन और सिद्धू का चला आ रहा विवाद अब खत्म हो चुका है। ऐसी भी चर्चा थी कि पार्टी के पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने सिद्धू के लिए राज्य में कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष और कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की सहमति बन गई है, बयान दिया था।

उसके बाद ‘मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब पार्टी का संभावित प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर कड़ा विरोध जताने पर हरीश रावत ने सफाई दी कि मैंने ऐसा नहीं कहा था’। ‌इसके बाद सिद्धू और कैप्टन के बीच एक बार फिर से थमता दिख रहा टकराव और ‘तेज’ हो गया। ‌रावत के इस बयान के बाद दोनों के बीच सुलह होने की उम्मीद थी, लेकिन इससे बात और बिगड़ गई। बताया गया कि इस बात से कैप्टन अमरिंदर सिंह नाराज हो गए हैं। कुल मिलाकर उत्तराखंड के भड्डु मे दाल गल नहीं रही थी कि पंजाब कि पंजाब का प्रेशर कूकर भी सीटी मारने लगा है

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