गंगा किनारे क्रेसर का विरोध -ताक पर एनजीटी के निर्देश

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गंगा के किनारे क्रेसर के विरोध में ग्रामीण।
मातली गाव में क्रेसर का रुकवाया काम।
एनजीटी के निर्देशों की धज्जियां उड़ाने का आरोप।
गिरीश गैरोला
गंगा भागीरथी नदी के किनारे धरना प्रदर्शन करते ये ग्रामीण मातली गाँव के है और गंगा नदी में चल रहे अवैध क्रेसर का विरोध कर रहे है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की नाक के नीचे देर रात तक भारी मशीनों से नदी को रौंदा जा रहा है जिसके कारण उसमें बड़े बड़े गड्ढे पड़ गए है। देर रात तक न सिर्फ नदी को खोदा जाता है बल्कि रेत बजरी के ट्रक रात दिन उनके घरों के पास से दौड़ रहे है। घरों में दरार पड़ गयी है और धूल और शोर से जीना मुश्किल हो गया है। इससे पूर्व भी कई बार जिला प्रशासन को लिखित रूप से सूचित किया गया है किंतु कोई कार्यवाही नही हुई उल्टे क्रेसर संचालकों से धमकी मिलने लगी गुस्साए ग्रामीणों ने ट्रकों का आवागमन रोक कर अपना विरोध जताया जिसके बाद डीएम आशीष चौहान ने एसडीएम और खान अधिकारी को मौके पर भेजकर अविलंब जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए है।
उत्तरकाशी जिले में डुंडा तहसील अंतर्गत गंगा भागीरथी नके तट पर आईटीबीपी कैम्प के पास चल रहे क्रेसर की धूल शोर से परेसान ग्रामीणों ने बिरोध में धरना खोल दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि देर रात तक भारी मशीनों से नदी को खोदा जाता है जिससे नदी में बड़े बड़े गड्ढे हो गए है। इसके बाद बडे ट्रको से देर रात तक उनके घरों के पास से शोर शराबे के साथ आवागमन जारी रहता है जिसके कारण उमके घरो में दरार पड़ गयी है। बे टाइम शोर शराबे और धूल से उनका जीना मुस्किल हो गया है। शिकायत करने पर उन्हें धमकी दी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्रेसर अवैध रूप से संचालित हो रहा है और गंगा नदी में मशीन चलाकर बड़े बड़े गड्ढे कर एनजीटी के मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। हैरानी कक बात ये है कि एनएच से लगा होने के बाद भी प्रशासन को जांच के लिए किसी शिकायती पत्र की जरूरत दरकार है।
डीएम उत्तरकाशी आशीष चौहान ने बताया कि एसडीएम और खान अधिकारी को मौके पर भेज कर अविलंब रिपोर्ट देने को कहा है।
ये अलग बात है कि धरने के दो दिन बाद भी रिपोर्ट डीएम तक नही पहुँच सकी।

https://youtu.be/TWp08fIjbhg

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