Dehradun ISBT का नासूर खत्म! बारिश में डूबती सड़कें अब इतिहास, सीएम-डीएम की टीमवर्क से आया स्थायी समाधान

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वर्षों की परेशानी को कहा अलविदा, देहरादून का आईएसबीटी इस बार पानी में नहीं डूबा… जनता बोली – “अब राहत की सांस ली है।”


ओपनिंग

“जहां हर बरसात में सड़कें नदी बन जाती थीं, वहां आज सूखा पड़ा है। लोग हैरान भी हैं, खुश भी… क्योंकि ISBT का वो पुराना दर्द, आखिर खत्म हो गया है!”


टूटे पैर, फंसी गाड़ियां, बहते सपने… अब सब अतीत!

देहरादून के आईएसबीटी इलाके में बरसात का मतलब था — घुटनों तक पानी, जाम में फंसे लोग और हादसों का डर। सिर्फ बादल बरसते थे, लेकिन लोगों की आँखों में भी पानी उतर आता था।

लेकिन इस बार तस्वीर बदल गई है। भारी बारिश के बावजूद सेंट जूड चौक और आईएसबीटी का इलाका पानी-पानी नहीं हुआ। न सड़कें डूबीं, न जिंदगी थमी।


सीएम धामी की “नो डूबान” कसम पूरी हुई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वादा किया था — “अबकी बार, आईएसबीटी में जलभराव पर मेरी distress visit नहीं होगी।”

और वादा निभाया भी। उनकी प्रेरणा पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने कमर कस ली। कोर कमेटी, तकनीकी विशेषज्ञ, और दिन-रात की मॉनिटरिंग ने कमाल कर दिया।

“लोगों की मुसीबत मेरी प्राथमिकता है। ये सिर्फ इंजीनियरिंग का काम नहीं, जनसेवा का संकल्प था।” – डीएम सविन बंसल


रेत, कीचड़, कूड़े का साम्राज्य… सब साफ!

पुराना ड्रेनेज जाम था। पानी नहीं बहता था, उल्टा सड़क पर चढ़ आता था।

डीएम ऑफिस की टीम ने टन-टन मिट्टी, कूड़ा और कीचड़ नालियों से बाहर निकाला।

“पहले कदम रखते ही गाड़ियां फिसल जाती थीं। अब देखिए, रोड पर सूखा ही सूखा है। दिल खुश हो गया।” – स्थानीय दुकानदार प्रमोद भंडारी


15 चैंबर, नई पाइपलाइन और रोड पर नया काला सोना

इस मेगा ऑपरेशन में –
15 ड्रेनेज चैंबर बनाए गए
✅ ढक्कन और रोड ब्लैकटॉप बदला गया
बिजली की लाइनों को भूमिगत किया गया
सीवरेज-ड्रेनेज की सफाई पूरी की गई

स्मार्ट सिटी बजट से फंडिंग हुई, और सुपरविजन के लिए एसडीएम कुमकुम जोशी को तैनात रखा गया।

“मानसून आता था, तो दहशत होती थी। अब डर खत्म हो गया।” – राहगीर कविता नेगी


जनता की आवाज – “धन्यवाद सरकार!”

लोगों का कहना है –
“पहले तो बारिश मतलब कीचड़, बदबू और एक्सीडेंट। अब सरकार ने सही मायने में स्मार्ट सिटी दिखाई है।”


क्लोजिंग (Powerful Line)

ISBT का पानी तो निकला ही… लेकिन लोगों के मन से बरसों का डर भी बह गया। देहरादून ने साबित कर दिया – जब इरादा मजबूत हो, तो नदियां भी रास्ता बदल देती हैं।


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