🟥 कारगर साबित हुआ डीएम का आदेश:
प्रधानमंत्री मोदी के आगमन पर जिला प्रशासन की चौकस तैयारी रंग लाई
देहरादून, 10 नवंबर 2025 —
राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर जब पूरा उत्तराखंड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में उमड़ा, उस समय देहरादून शहर ने एक मिसाल कायम की — ना जाम, ना अफरा-तफरी!
डीएम सोनिका के सटीक निर्णय और मजबूत प्रशासनिक रणनीति ने देहरादून को एक दिन के लिए “जाम-मुक्त राजधानी” बना दिया।
🚧 13 घंटे खुला रहा लच्छीवाला टोल प्लाजा
प्रधानमंत्री के एफआरआई आगमन को ध्यान में रखते हुए, जिलाधिकारी ने शुक्रवार रात ही आदेश जारी कर दिया था — 9 नवंबर को सुबह 5 बजे से शाम 6 बजे तक लच्छीवाला टोल प्लाजा और आशा रोडी बैरियर पूरी तरह निशुल्क रहेंगे।
इन 13 घंटों के दौरान हजारों वाहनों का टोल नहीं काटा गया। यहां तक कि फास्ट टैग सिस्टम भी रोक दिया गया, ताकि कोई वाहन रुके नहीं और शहर तक पहुंचने का सफर सुगम रहे।
🚗 बिना रुके दौड़ी राजधानी की सड़कें
रविवार सुबह जैसे ही घड़ी ने पांच बजाए, लच्छीवाला टोल प्लाजा पर वाहनों की कतारें तो दिखीं, लेकिन रुकावट नहीं।
ट्रैफिक पुलिस, जिला प्रशासन और टोल कर्मियों की संयुक्त टीम लगातार एक्टिव रही।
एक स्थानीय ड्राइवर ने बताया —
“आज पहली बार लगा कि देहरादून में भी बड़े कार्यक्रम बिना जाम के हो सकते हैं। सुबह से शाम तक गाड़ी बिना रुके निकली।”
🏛️ डीएम के आदेश ने दिलाई राहत
प्रधानमंत्री मोदी के आगमन के दौरान सीमावर्ती और पर्वतीय जिलों से हजारों की संख्या में वाहन देहरादून पहुंचे।
फिर भी शहर की सड़कों पर ना कोई जाम, ना कोई हड़बड़ी।
डीएम savin bansal ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश जारी किया था कि टोल निश्शुल्क रहेगा, ताकि शांति और कानून व्यवस्था पर असर न पड़े।
इस फैसले ने न सिर्फ ट्रैफिक को राहत दी, बल्कि प्रशासनिक दक्षता की मिसाल भी पेश की।
🕕 शाम छह बजे फिर से शुरू हुआ टोल
जैसे ही घड़ी ने छह बजाए, टोल प्लाजा पर फास्ट टैग फिर से सक्रिय हुआ और नियमित व्यवस्था बहाल हो गई।
13 घंटे की इस राहत अवधि ने देहरादून को “सुव्यवस्थित यातायात” का एक आदर्श उदाहरण बना दिया।
💬 जनता की आवाज
एक स्थानीय व्यापारी ने कहा —
“हर बार बड़े कार्यक्रमों में ट्रैफिक से लोग परेशान हो जाते हैं, लेकिन इस बार प्रशासन की तैयारी वाकई काबिले तारीफ थी।”
🌄 अंत में…
राज्य स्थापना दिवस के इस ऐतिहासिक दिन पर देहरादून ने न केवल प्रधानमंत्री का स्वागत किया, बल्कि एक “सुसंगठित, संवेदनशील और स्मार्ट प्रशासन” की झलक भी दिखाई।
जिला प्रशासन की यह पहल आने वाले आयोजनों के लिए एक नई राह दिखाती है — जहां आदेश सिर्फ कागज़ पर नहीं, सड़कों पर असर दिखाते हैं।
