धामी सरकार का फार्मा धमाका: उत्तराखण्ड बनेगा भारत का दवा हब, घटिया दवाओं पर ‘नो टॉलरेंस’!

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फार्मा हब बनने की ओर उत्तराखण्ड की तेज़ रफ्तार

  • अधोमानक दवाओं पर सरकार का सख्त एक्शन प्लान
  • विश्वस्तरीय लैब्स और सख्त निगरानी से बनेगी भरोसेमंद पहचान

ओपनिंग

उत्तराखण्ड अब सिर्फ पहाड़ों, पर्यटन और तीर्थों के लिए नहीं, बल्कि भारत के फार्मा पावरहाउस के रूप में भी उभरने जा रहा है! लेकिन धामी सरकार ने साफ कर दिया है – गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं, चाहे दवा बनाने वाली कितनी भी बड़ी कंपनी क्यों न हो।


💥 स्टोरी कंटेंट

खाद्य संरक्षा और औषधि प्रशासन मुख्यालय, देहरादून में सोमवार को फार्मा इंडस्ट्री की नब्ज पर हाथ रखते हुए तारीख़ी बैठक हुई। खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के आदेश पर ये बैठक बुलाई गई थी।


औद्योगिक साख पर मंडरा रहा था संकट

बैठक में बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियों के प्रतिनिधि आए। उन्होंने ड्रग अलर्ट पर चिंता जताई, जो कई बार बिना पूरी जांच के पोर्टल पर अपलोड हो जाते हैं। इससे सिर्फ कंपनियों का नाम ही नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की इमेज भी दांव पर लग जाती है।

“हमें बदनाम किया जाता है जबकि असली गुनहगार कोई और होते हैं!”
— फार्मा कंपनी के प्रतिनिधि का दर्द


सरकार ने सुनाई खरी-खरी

राज्य औषधि नियंत्रक ताजबर सिंह जग्गी ने दो टूक कहा –

“सरकार फार्मा इंडस्ट्री के साथ खड़ी है, लेकिन औषधि की गुणवत्ता पर कोई सौदा नहीं किया जाएगा।”

उन्होंने सभी मैन्युफैक्चरर्स को GMP नियमों का सख्ती से पालन करने की सख्त हिदायत दी। साथ ही चेतावनी भी दे दी कि घटिया दवाओं पर एफआईआर और सख्त कार्रवाई से कोई नहीं बच पाएगा।


उत्तराखण्ड बनेगा फार्मा का ग्लोबल सेंटर

राज्य के स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने भरोसा जताया कि आने वाले सालों में उत्तराखण्ड देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के फार्मा मानचित्र पर चमकेगा।

“हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखण्ड फार्मा हब बने। हम गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। NABL मान्यता मिलने के बाद यहां की लैब्स के रिपोर्ट्स इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बन जाएंगे।”
— डॉ. आर. राजेश कुमार

अभी राज्य में 285 फार्मा यूनिट्स हैं, जिनमें से 242 WHO सर्टिफाइड हैं। यहां बनी दवाएं 20 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट हो रही हैं।


अवैध धंधों पर चलेगी तलवार

धामी सरकार का संदेश साफ है —

“घटिया दवाएं बनाने वालों की खैर नहीं। राज्य की इज्जत पर आंच नहीं आने देंगे।”

कूपर फार्मा के Buprenorphine Injection जैसे विवादित मामलों का जिक्र करते हुए अधिकारियों ने कहा कि बिहार की अवैध यूनिट्स ने जो गड़बड़ की, उसका ठीकरा बेवजह उत्तराखण्ड पर फोड़ दिया गया। अब ऐसी नौबत दोबारा नहीं आने दी जाएगी।


🛡️ क्लोजिंग लाइन

उत्तराखण्ड अब केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि फार्मा की भी “धन भूमि” बनने को तैयार है — पर याद रखिए, यहां की दवाओं में सिर्फ असर होगा, कोई मिलावट नहीं!


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