गौचर में धामी का दमदार अंदाज़!- 73वें राजकीय औद्योगिक एवं सांस्कृतिक मेले का भव्य आग़ाज़

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**🚨 गौचर में धामी का दमदार अंदाज़!
– परंपरा, राजनीति और विकास की बड़ी पटकथा!


🌄 उत्तराखंड की धरती पर संस्कृति और विकास का संगम

चमोली के गौचर में बुधवार की सुबह एक अलग ही जोश, रौनक और गर्व लेकर आई। 73वें राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले का उद्घाटन होते ही मैदान तालियों, ढोल-दमाऊ और जनसमूह की आवाज़ों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आगमन होते ही माहौल उत्साह से भर गया—बैंड की मधुर धुन… फूल-मालाओं की बरसात… और जनता की उमंग!


💬 “यह मेला हमारी सांस्कृतिक शक्ति है…” – सीएम धामी

मुख्यमंत्री ने विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा—

“गौचर मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं, यह हमारी सांस्कृतिक विरासत की जीवित किताब है… हमारी स्थानीय आर्थिकी की रीढ़ है।”

उन्होंने कहा कि लोकल फॉर वोकल और मेड इन इंडिया जैसे अभियानों ने पहाड़ी उत्पादों को नई पहचान दी है। मातृशक्ति के उत्पाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों को चुनौती दे रहे हैं—और यह उत्तराखंड की असली ताकत है!


🚁 बड़ी घोषणाएँ – 18 सीटर हेलीसेवा और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट

धामी ने कार्यक्रम में कई अहम घोषणाएँ कीं—

  • गौचर में 18-सीटर हेलीसेवा पिथौरागढ़ मॉडल पर शुरू होगी।
  • नगर क्षेत्र के चार प्रमुख स्थानों पर पार्किंग सुविधाओं का विकास।
  • साकेत नगर – रघुनाथ मंदिर – चटवापीपल मोटर मार्ग का निर्माण।
  • गौचर स्टेडियम निर्माण के लिए स्वीकृत धनराशि—काम जल्द शुरू होगा।

गौचर क्षेत्र के लिए ये घोषणाएँ विकास की नई लकीरें खींचती दिखाई दीं।


🏆 सम्मान और सराहना

कार्यक्रम में दो प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया—

  • वरिष्ठ पत्रकार हरीश मैखुरीगोविंद प्रसाद नौटियाल पत्रकार सम्मान
  • शिक्षाविद एवं साहित्यकार डॉ. नंद किशोर हटवालपंडित महेशानंद नौटियाल शिक्षा-साहित्य प्रसार सम्मान

इन पलों ने समारोह को भावनाओं और गर्व से भर दिया।


🎡 पहला दिन: परंपरा, खेल और सांस्कृतिक रंगों का धमाका

पहले दिन की गतिविधियाँ पूरे गौचर को जीवंत कर गईं—

  • ईष्ट रावल देवता की पूजा
  • स्कूली बच्चों की प्रभात फेरी
  • झंडारोहण और मार्चपास
  • क्रॉस-कंट्री दौड़
  • बालक-बालिकाओं की प्रतियोगिताएँ
  • नेहरू चित्रकला से लेकर शिशु प्रदर्शनी तक रंगीन झलकें
  • शाम को प्रसिद्ध लोकगायिका डॉ. पम्मी नवल की “जागर संध्या”

पारंपरिक पहाड़ी कला से सजा मुख्य पांडाल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।


🗣️ स्थानीय प्रतिनिधियों ने रखी क्षेत्रीय माँगें

विधायक अनिल नौटियाल और मेला उपाध्यक्ष संदीप नेगी ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए क्षेत्र की मुख्य समस्याओं का मुद्दा उठाया और समाधान हेतु माँगपत्र सौंपा।


👥 जनसैलाब और नेताओं की भारी मौजूदगी

कार्यक्रम में थराली, रुद्रप्रयाग के विधायक से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष, राज्य मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी और भारी संख्या में पत्रकार व आमजन मौजूद रहे।
गौचर की गलियों में हर तरफ चर्चा— “इस बार मेला कुछ अलग, कुछ बड़ा है…”


🔥 समापन पंक्ति – यह सिर्फ मेला नहीं, उत्तराखंड की धड़कन है!

गौचर का मेला एक बार फिर साबित करता है कि पर्वतीय संस्कृति सिर्फ परंपरा नहीं—यह ऊर्जा है, पहचान है, और विकास का पुल है।
और इस बार, धामी सरकार की घोषणाओं ने इस मेला-धड़कन को और मजबूत धड़कन दे दी है।

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