धनोल्टी नाम तो बहुत सुना है फिर ये क्या ? आप भी यही सोच रहे होंगे पर यही हकीकत है कि न तो इसकी खूबसूरती का लिहाज हुआ और न मेहनती किसानो पर ही किसी को तरस आया |
स्वस्थ्य शिक्षा और रोजगार जैसे मिलभूत मुद्दों के साथ केंद्र सरकार वर्ष 2022 तक किसानो की इनकम दो गुना करने की बात कह रही है किन्तु दुर्गम पहाड़ी प्रदेश उत्तराखंड के टिहरी जिले मे पर्यटक स्थल धनोल्टी के हालात कुछ और ही बया कर रहे है | नगदी फसलों और प्रकृतिक सुंदरता से भरपूर इस इलाके मे 40 वर्ष पुरानी वन विभाग की टूटी फूटी सड़क से किसी तरह ज़िंदगी सरक रही है | भले ही दुनिया 4जी से 5 जी मे छलांग लगा चुकी हो पर यहा तो ज़िंदगी 40 वर्ष पूर्व से ही रुकी हुई है | मेरु रेबार की टीम ने स्थानीय जन प्रतिनिधियों के साथ इलाके का दौरा किया तो सरकारी दावो को झुटलाने वाली तस्वीर सामने आयी है |
देवेंद्र बेलवाल धनोल्टी
पर्यटक स्थल धनोल्टी तहसील और थौल धार ब्लॉक के दर्जनो गाव आज भी वन विभाग की टूटी फूटी सड़क से किसी तरह गुजारा कर रहे है| इस अंतराल मे दुनिया चाँद सितारो पर पहुच गयी किन्तु धनोल्टी के लोग 40 वर्ष पुरानी वन विभाग की रोड पर ही झटके खाने को मजबूर है | वन विभाग हर वर्ष सड़क मरम्मत के नाम पर खर्च तो करता है पर सड़क चलने लायक तैयार नहीं हो सकी |
स्थानीय लोग कच्चे हल्के वहाँ मार्ग को लोक निर्माण विभाग अथवा पीएमजीएसवाई को सौंपने की मांग कर रहे है | यह इलाका प्रकृतिक सुंदरता के साथ नगदी फसलों के लिए जाना जाता है सड़क मार्ग के अभाव मे कास्तकार को उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाता है माल मंडी मे बेचने के बाद कीमत का बड़ा हिस्सा ढुलान मे ही खर्च हो जाता है | इतना ही नहीं बीमार होने पर कई बार अस्पताल पहुचने से पहले ही मरीज रास्ते मे ही दम तोड़ देता है |
क्षेत्र के प्रधान सुमित्रा देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य तपेन्द्र बेलवल, व्यापार मण्डल अध्यक्ष रघुवीर रमोला और जिला पंचायत सदस्य सनवीर बेलवाल ने बताया की यदि धनोल्टी से मोरियाणा तक भी सड़क निर्माण हो जाता है तो उत्तरकाशी और देहारादून के लिए शॉर्ट कट और वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है
