क्षैतिज आरक्षण को लेकर धरातल पर ठोस कार्य न होने पर आंदोलकारी संयुक्त मंच में निराशा

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देहरादून। राज्य आंदोलनकारियों के क्षैतिज आरक्षण को लेकर आंदोलनकारी संयुक्त मंच के तत्वावधान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस, प्रेस क्लब देहरादून में आयोजित की गई। आंदोलनकारियों ने सरकार द्वारा कृषि मंत्री सुबोध उनियाल नीत मन्त्रिमण्डलीय उप समिति की सिफारिशों को मंजूरी दिये जाने का स्वागत करते हुए इस बात पर निराशा व्यक्त की कि 13 मार्च को गैरसैंण में आयोजित कैबिनेट बैठक को हुये एक माह से अधिक का समय बीत चुका है। परंतु अब तक धरातल पर कुछ भी ठोस होता हुआ नहीं दिखाई दे रहा।
आंदोलनकारियों ने कहा कि हम सरकार से कई दौर की बातचीत कर चुके हैं। एक बार 42 दिनों तक धरना दे चुके, मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर चुके। परन्तु अभी तक आश्वासन अथवा सहमति के अतिरिक्त कुछ भी हमारे हाथ नहीं आया है। हमारी समझ में यह नहीं आ रहा है कि नौकरशाही सरकार को गुमराह कर रही है या फिर सरकार स्वयं ही भ्रम की स्थिति में है। आंदोलनकारियों ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा जो स्वयं कानून के अच्छे जानकार हैं, की सबल पैरवी के पश्चात भी पत्रावली इधर उधर कैसे झूल रही है। स्वयं मुख्यमंत्री समेत पूरी कैबिनेट के आदेश को भी ठंडे बस्ते में डालने का सम्भवतः यह पहला उदाहरण होगा।
अतः सरकार स्पष्ट करे कि वह वास्तव में करना क्या चाहती है। आंदोलनकारियों ने कहा है कि यदि एक सप्ताह में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो हम पुनः आंदोलन की राह जाने को विवश हो जायेंगे। प्रैस वार्ता को संबोधित करने वालों में क्रान्ति कुकरेती, डीएवी महाविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष वीरेन्द्र पोखरियाल(पप्पू), मोहन रावत, अम्बुज शर्मा आदि आंदोलनकारी थे।पत्रकार वार्ता के दौरान पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष विजय प्रताप मल्ल,आशीष उनियाल,हरदीप सिंह लक्की, विनोद असवाल, प्रताप सिंह, मनोज कुमार, वीरेन्द्र रावत, राम किशन आदि आंदोलनकारी मौजूद थे।

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