गरीबी पढ़ाई पर भारी नहीं पड़ेगी!
सबहेडलाइन:
, दूरस्थ पहाड़ी गांव के बच्चों को मुफ्त शिक्षा का सहारा
✍️ दमदार शुरुआत:
जहां सड़कें मुश्किल से पहुंचती हैं,
वहीं सपने सबसे बड़े होते हैं।
देहरादून जिले के दूरस्थ गांव अटाल में अब गरीबी बच्चों की पढ़ाई नहीं रोक पाएगी।
जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल से 300 गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा की नई रोशनी मिली है।

🏔️ दूरस्थ अटाल से उठी एक पुकार
तहसील त्यूणी के ग्राम व पोस्ट अटाल में
कई मेधावी बच्चे पढ़ना चाहते थे—
लेकिन किताबों, फीस और संसाधनों की कमी
उनके सपनों पर भारी पड़ रही थी।
स्थानीय लोगों और बच्चों को पढ़ा रहे एनजीओ ने यह पीड़ा सीधे डीएम तक पहुंचाई।
⚡ डीएम का तुरंत एक्शन
मामले को गंभीरता से लेते हुए
डीएम सविन बंसल ने
मुख्य विकास अधिकारी और मुख्य शिक्षा अधिकारी को
CSR फंड से सहायता का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
नतीजा—
यूजीवीएनएल ने CSR मद से 4.50 लाख रुपये स्वीकृत किए।
📚 300 बच्चों को मिलेगा मुफ्त शिक्षा का सहारा
इस धनराशि से
अटाल क्षेत्र के करीब 300 आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को
मुफ्त शिक्षा सहायता मिलेगी।
यह सिर्फ आर्थिक मदद नहीं—
यह भविष्य में निवेश है।
🎙️ डीएम सविन बंसल का संदेश
“शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है।
किसी भी बच्चे की प्रतिभा उसके परिवार की आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि
दूरस्थ और पिछड़े इलाकों के बच्चों को
समान अवसर देना प्रशासन की प्राथमिकता है।
🌱 बदलता पहाड़, बनता भविष्य
इस पहल से न केवल
अटाल की शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी,
बल्कि गरीब परिवारों के बच्चों को
आगे बढ़ने का वास्तविक मौका मिलेगा।
जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि
ऐसे जनहितकारी प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।
✨ भावुक समापन:**
जब प्रशासन संवेदनशील हो,
तो पहाड़ के सुदूर गांवों में भी
कलम, किताब और सपनों की जीत होती है।
अटाल के बच्चों की आंखों में अब
अंधेरा नहीं—उजाला है।
