🚨 छल का इलाज! निकला सिस्टम का सच
जनरेटर बंद — मरीजों को रामभरोसे छोड़, कंपनी पर ₹5 लाख जुर्माना
⚠️ जब अस्पताल बने ‘काल कोठरी’, और इलाज बना लापरवाही का मज़ाक
देहरादून की सुबह 30 जुलाई को एक प्रशासनिक तूफान के साथ जागी।
DM सविन बंसल के नेतृत्व में 4 प्रशासनिक टीमें, शहर के 12 PPP (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर चल रहे अर्बन पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पर एक साथ टूट पड़ीं।
पर नजारा देखकर खुद अफसरों की आंखें भी फटी रह गईं—
डॉक्टर नदारद, नर्सें भूतिया एंट्री में दर्ज, सफाई राम भरोसे, दवाइयों की किल्लत और मरीजों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं!

🏥 अस्पताल या कब्रगाह? मरीजों के लिए नहीं था पानी, न दवा, न बैठने की जगह
जिला प्रशासन को पहले से मिल रही थीं शिकायतें—
- टीकाकरण की दवाइयों के लिए जरूरी कोल्ड चेन जनरेटर ही गायब
- आरओ सिस्टम खराब, पानी नहीं
- बायोमेडिकल वेस्ट सामान्य कचरे में फेंका जा रहा था
- ऑक्सीजन सिलेंडर चालू कैसे करें? किसी को पता नहीं!
जिन पीएचसी में रोज़ मरीजों की कतार लगती है, वहां दीवारों पर मकड़ी के जाले, शौचालय गंदगी से अटे, और वेलनेस रजिस्टर अधूरा मिला।

📍 कहां-कहां पड़े छापे?
- DM सविन बंसल: जाखन, गांधीग्राम
- CDO अभिनव शाह: चूना भट्टा, अधोईवाला, कारगी
- SDM हरी गिरी: रीठामंडी, बकरालवाला, खुड़बुड़ा
- SDM अपूर्वा सिंह: दीपनगर, माजरा, बीएस कॉलोनी
हर जगह की कहानी एक जैसी — मानकों की धज्जियां, सिस्टम की दुर्गति।
💣 कंपनी पर चला प्रशासन का हथौड़ा!
अस्पतालों का संचालन कर रही “अक्षांस/चित्रांश जेवीके प्रा. लि.” पर
➡️ ₹5 लाख का प्रारंभिक अर्थदंड
➡️ अनुबंध समाप्ति की मुख्य सचिव को सिफारिश
➡️ MOU की समीक्षा और बड़ी कार्यवाही की तैयारी
🗣️ DM सविन बंसल ने कहा:
“जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं। जिम्मेदारों पर बड़ी कार्यवाही तय है।”
🤒 मरीज बोला — “बीमार हम, सिस्टम भी!”
👵 “बेटी का टीका लगवाने आई थी, पर डॉक्टर थे ही नहीं…”
👨🦳 “न दवा मिली, न जवाब… उल्टा स्टाफ ने कहा – बाहर से ले लो!”
🔍 सवाल ये नहीं कि डॉक्टर क्यों नहीं थे… सवाल ये है कि सिस्टम कहां था?
क्या पीपीपी मॉडल सिर्फ पैसा बनाने का जरिया है?
क्या गरीबों के नाम पर खोल दिए अस्पताल, पर इलाज देने की ज़िम्मेदारी किसी की नहीं?
🧠 अब जनता को सोचना है… और प्रशासन को रोकना है
👉 बीमार शरीर का इलाज दवा से होता है,
बीमार सिस्टम का इलाज — कड़ी कार्यवाही से।
आज जिला प्रशासन ने पहला इंजेक्शन दिया है। क्या अगली बार सुधार होगा या फिर जाँच फिर ज़ख्म दिखाएगी?
