पर्यावरण संरक्षण के दोहरे मानक ? कूड़े से उठती दुर्गंध और जलते कूड़े के जहरीले धुए पर क्यो नहीं जाती एनजीटी की नजर?

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संजय कुँवर जोशीमठ,
एक तरफ केंद्र और राज्य सरकार प्रदूषण को लेकर कठोर कानून लाने की तैयारी कर रही है और अध्यादेश ले कर आयी है व हीं दूसरी तरफ ग्रीन ट्रिव्यूनल के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए जोशीमठ के प्रवेश द्वार पर नगरपालिका का कूड़ा भण्डार दुर्गन्ध तो पैदा कर ही रहा है जिससे आये दिन भालुओं के कई झुंड इस कूडा घर में दावत उड़ाने पहुँच रहे है ,

साथ ही यहाँ खुले में कूडा जलाकर जहरीले धुए का गुबार पर्यावरण को प्रदूषित भी कर रहा है। इस स्थान से महज   100मीटर के दायरे में नंदा देवी नेशनल पार्क की चैक पोस्ट होने के बावजूद वन विभाग आजतक इस और कभी ध्यान नही दे सका है,वर्षों से नगर के प्रवेश द्वारा पर कूड़ा भण्डारण कर उसे धड़ल्ले से जलाया जा रहा है परंतु मजाल की नगरपालिका परिषद् कूड़ा भण्डारण की समुचित व्यवस्था कर सके और न ही सरकारें इस ओर ध्यान दे रही है। हर बार समाचार पत्रों में इस बाबत खबर भी छपती है जो सिर्फ अख़बारों और समाचार चैनलों की सुर्खियों तक सिमट कर रह जाती है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और चार धाम के तीर्थयात्री इसी दुर्गंध भरे मार्ग से जाने के लिए मजबूर है कोई सुनने वाला नहीं है जो की काफी दुर्भाग्यपूर्ण बात है …!!!

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