उत्तराखंड मे सड़कों पर गड्डे है या सरकार मे ही गड्डे पड़े हुए है ?
लोक निर्माण विभाग इन गड्डो को भरेगा या विभाग के मंत्री ?
क्या कैबनेट मंत्री सतपाल महाराज की मुश्किलें फिर से बढ़ने वाली हैं?
क्या प्रदेश मे किसी को भी बड़े महत्वपूर्व पदो पर ऐसे ही बैठाया जा सकता है ? क्या महाराज ने खुद ऐसा जाल बिछाया है जिसमें वे खुद ही उलझ कर रह गए हैं ?
क्या सतपाल महाराज के सामने आने वाले वक्त में बड़ा संकट आने वाला है?
यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि सचिवालय संगठन ने महाराज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और वो इसलिए कि महाराज ने आई पी सिंह जो उनके निजी सचिव थे के खिलाफ f.i.r. करवाई थी
सचिवालय मे अफसर और सरकार के मंत्री मिल जुल कर काम करते हैं तभी सरकार चलती है तभी सिस्टम चलता है लेकिन यहां तो मंत्री ने जब शासन के एक अधिकारी के खिलाफ एफआइआर कराई तो फिर उन पर भी अब आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है ।
महाराज ने इस साल मई में शिकायत की थी । निजी सचिव आई पी सिंह की तब जांच हुई और तब जांच में एसीएस राधा रतूड़ी ने आईपी सिंह को निर्दोष माना था । इसीलिए अब सतपाल महाराज की कार्यप्रणाली पर , सतपाल महाराज के रवैए पर उनके रुख पर सचिवालय संघ गंभीर आरोप लगा रहा है
अब सवाल ये उठता है कि क्या सतपाल महाराज ने ही हीं लापरवाही की है?
क्या उन्होंने खुद फाइल संभाल कर नहीं रखी ?
क्या उन्होंने खुद ही अपने निजी सचिव को फाइल दी थी? जिसमे एक अधिकारी को बिना मंत्री की सहमति के विभागाध्यक्ष बना दिया गया
अब सरकार के भीतर ऐसे बहुत से खेल हो रहे हैं तो समझा जा सकता है कि उत्तराखंड की जनता का क्या हाल होगा। सतपाल महाराज के खिलाफ अब पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी मोर्चा खोल दिया है और उन्होंने अपने ट्वीट मे साफ कहा कि अगर फर्जी हस्ताक्षर हुए हैं तो कैसे हुए ? कहां हुए? और आठ 10 महीने बाद अगर यह चीजें सामने आ रही हैं तो इन हालात में सड़कों के गड्ढे कैसे भरेंगे जब सरकार में खुद इतने गड्ढे पड़े हुए हैं
उत्तराखंड सरकार मे गड्ढे वाली राजनीति तो बढ़ती रहेगी लेकिन फिलहाल महाराज के सामने खुद को पाक साफ करने की चुनौती है। क्योंकि पहली जो जांच हुई उसमें अधिकारी को निर्दोष पाया गया अब सतपाल महाराज अपने पीआरओ के माध्यम से एफ़आईआर कर चुके हैं लेकिन इस लड़ाई में वे खुद को कैसे पाक साफ साबित करेंगे ये ? बड़ा सवाल उनके सामने बना हुआ है
