मंच पर भावनाओं का सैलाब और फिर सन्नाटा!
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🎙️ “45 मिनट बोले… 5 मिनट रोए… और फिर गिर पड़े उपराष्ट्रपति!”
उत्तराखंड के नैनीताल में कुमाऊं विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह का समापन एक भावनात्मक तूफान में बदल गया,
जब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ कार्यक्रम के बाद मंच से उतरते ही अचानक बेहोश होकर गिर पड़े।
🤝 पुरानी दोस्ती की एक झप्पी… और फूट पड़ा जज़्बातों का समंदर
धनखड़ मंच से उतरकर सीधे पहुंचे अपने 1989 के संसदीय साथी डॉ. महेंद्र पाल के पास।
दोनों ने एक-दूसरे को भीगी आंखों से गले लगाया।
“तुम्हें देखकर सब कुछ ताज़ा हो गया…”
— धनखड़, भावुक होकर
मंच के कोने में दो बुज़ुर्ग नेता… एक-दूसरे को गले लगाए बिलखते रहे।
डॉ. पाल की आंखें भर आईं… और फिर धनखड़ भी अपने आंसू नहीं रोक पाए।

🩺 और फिर… एक झटका! उपराष्ट्रपति वहीं गिर पड़े
गले लगते ही अचानक उपराष्ट्रपति की तबीयत बिगड़ गई।
हॉल में सन्नाटा छा गया!
सुरक्षा अधिकारी और डॉक्टर दौड़े।
मंच पर अफरा-तफरी मच गई।
तुरंत मेडिकल टीम ने प्राथमिक उपचार दिया।
“शायद यादों ने दिल को झकझोर दिया…”
— मौके पर मौजूद एक अधिकारी की टिप्पणी
🏥 राजभवन रवाना, अब स्वास्थ्य स्थिर
प्राथमिक उपचार के बाद राज्यपाल गुरमीत सिंह उन्हें तुरंत राजभवन लेकर रवाना हुए।
सूत्रों के अनुसार अब उपराष्ट्रपति की तबीयत स्थिर है।
लेकिन जो दृश्य नैनीताल में आज देखने को मिला —
वो हर किसी को अंदर तक झकझोर गया।
💬 भावनाएं भी कभी कमजोर कर देती हैं… यहां राजनीति नहीं, इंसानियत दिखी
राजनीति के मंच पर अक्सर शब्दों की लड़ाई होती है,
लेकिन आज वहाँ आंसुओं का आलिंगन था।
कभी-कभी एक झप्पी… सालों की दूरी मिटा देती है,
और कभी वही झप्पी किसी को तोड़ भी देती है।
📢 Meru Raibar की विशेष अपील:
स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ भावनाओं की भी देखभाल ज़रूरी है।
क्योंकि दिल भी कभी-कभी थक जाता है…
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