उत्तरकाशी में आग से धधक रहे जंगल, हुआ धुआं-धुआं

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उत्तरकाशी। सीमांत उत्तरकाशी जिले में गंगा घाटी से लेकर यमुना घाटी क्षेत्र तक जंगलों में लगी आग विकराल रूप लेती जा रही है। कई वन क्षेत्रों में जंगल की आग बेकाबू हो चुकी है, जिससे पर्यावरण, वन संपदा और वन्य जीवों के जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। जिला मुख्यालय से महज कुछ ही दूरी पर स्थित जंगलों में भी आग लगी है, जिसकी लपटें डरा रही है। वहीं, आग लगने से चारों धुआं फैलने से सांस लेना मुश्किल हो गया है।
दरअसल, धरासू बैंड के सामने और यमुनोत्री हाईवे पर फेडी के पास स्थित जंगलों में आग लगातार धधक रही है। आग के कारण पूरे क्षेत्र में चारों ओर धुएं का गुबार छाया हुआ है, जिससे दृश्यता यानी विजिबिलिटी भी प्रभावित हो रही है। जंगलों में लगी आग से निकलने वाला धुआं आसपास के रिहायशी इलाकों तक फैल गया है, जिससे स्थानीय लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
समाजसेवी सुनील थपलियाल ने कहा कि उत्तरकाशी जिले की गंगा घाटी और यमुना घाटी के करीबन सभी वन प्रभाग क्षेत्रों में जंगल की आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इससे न केवल वन्यजीवों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि बेशकीमती लकड़ी और अन्य वन संपदा भी नष्ट हो रही है। वन विभाग को तत्काल आग बुझाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे।
उन्होंने आग पर जल्द काबू पाने के लिए वन विभाग को गंभीर होने की आवश्यकता पर जोर दिया। उधर, जंगलों में लगातार बढ़ रही आग की घटनाओं को लेकर वन विभाग और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो इसके दूरगामी और गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। पहले ही बारिश और बर्फबारी नहीं हो रही है। ऐसे में वनाग्नि की लगातार बढ़ती घटनाएं भविष्य के ठीक नहीं कहा जा सकता है। प्रभारी वनाधिकारी उत्तरकाशी वन प्रभाग डीपी बलूनी ने कहा कि वन में लगी आग को बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। जल्द ही वनों में लगी आग पर काबू पाया जाएगा।
गौर हो कि हाल गी में चमोली जिले में स्थित नंदा देवी नेशनल पार्क के अंतर्गत आने वाले जंगलों में भीषण आग लग गई थी। जिस पर 6 दिन बाद कड़ी मशक्कत के बाद काबू पाया जा सका। आग इतनी भयानक तरीके से लग गई थी कि उस पर काबू पाने के लिए एयरफोर्स को तैनात करना पड़ा। हालांकि, हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं किया गया, लेकिन साहसी वनकर्मियों ने आग को बुझाने में अहम भूमिका निभाई। जंगल की आग की चपेट में आकर बहुमूल्य वन संपदा जलकर नष्ट हो रही है। जबकि, आग के कारण जंगली जानवरों का प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हो रहा है, जिससे उनके जीवन पर सीधा खतरा पैदा हो गया है। आग से बचने के लिए वन्यजीवों का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

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