राज्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ खोला मोर्चा

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देहरादून। प्रदेश उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि देश में वोट चोरी के दो मामले जो न्यायालय की दृष्टि में सिद्ध हुए हैं उनमें पहला चंडीगढ़ के मेयर के चुनाव में पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह का मामला है जिसमें वे वोटों की चोरी करते हुए कैमरे में साफ साफ पकड़े गए और उच्चतम न्यायालय ने उसका संज्ञान ले कर उनको प्रताड़ना दी व चंडीगढ़ के मेयर का निर्वाचन दुरुस्त कर मसीह ने घोषित मेयर को पद से हटा कर हराए गए मेयर को निर्वाचित घोषित किया व दूसरा मामला वोट चोरी का जो न्यायालय की दृष्टि में सिद्ध हुआ वह उत्तराखंड के इस वर्ष संपन्न त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में दो जगह नाम वाले मतदाताओं को पंचायती राज कानून के विपरीत चुनाव लड़ने की अनुमति दे कर उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने की। राज्य निर्वाचन आयोग के इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय नैनीताल ने स्थगन आदेश दिया फिर इस पर अमल करने के लिए कहा किन्तु राज्य निर्वाचन आयोग ने उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं किया और ऐसे लोग राज्य में चुनाव लड़े जिनके नाम दो या दो से अधिक मतदाता सूची में थे। श्री धस्माना ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी धृष्टता दिखाते हुए न केवल उच्च न्यायालय की अवमानना की बल्कि उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय पहुंच गया जहां न केवल माननीय उच्चतम न्यायालय ने उनके विरुद्ध टिपण्णी की बल्कि राज्य निर्वाचन आयोग पर दो लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया। धस्माना ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से जहां राज्य निर्वाचन आयोग के कानून विरुद्ध कम करना साबित हुआ वहीं यह भी साबित हुआ कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी भाजपा के साथ मिल कर वोट चोरी में सहयोग किया इसलिए ऐसे राज्य निर्वाचन आयुक्त को एक पल भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। धस्माना ने कहा कि जब तक सुशील कुमार को बर्खास्त नहीं किया जाता कांग्रेस उनके विरुद्ध अपना आंदोलन जारी रखेगी।

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