देहरादून। आम आदमी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवीन पिरशाली ने कहा कि कोरोना संकट के चलते प्रवासी भाई बहनों की घर वापसी और लॉक डाउन के कारण उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आय लगभग शून्य हो गयी है, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा है। एक अनुमान के मुताबिक लगभग ढाई लाख प्रवासी इस संकट के चलते लोग घर वापसी करेंगे, जिसमें से लगभग 2 लाख प्रवासी ग्रामीण क्षेत्र से सम्बंधित हैं। इन प्रवासियों का हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान था। जब ये लोग बाहर काम कर रहे थे तो 5 से लेकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह उत्तराखण्ड में अपने परिवार के लिए बैंक या पोस्ट ऑफिस के माध्यम से भेजते थे। इस पैसे को उनके घर वाले गांव की दुकानों व स्थानीय बाजारों से सामान की खरीद, बच्चों की फीस, बिजली का बिल व अन्य जरूरतों के लिए खर्च करते थे, जिससे हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था चलती थी। ये 2 लाख लोग 8000 रुपये प्रति व्यक्ति की औसत से प्रति माह 1 अरब 60 करोड़ रुपिया हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में भेजते थे और एक वर्ष में लगभग 20 अरब रुपये का सीधा योगदान इन प्रवासी भाई बहनों का हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में था। इसके अलावा गांव में हर एक परिवार विभिन्न माध्यमो जैसे बकरी, गाय, बैल, भैस, अनाज बेच कर या मजदूरी और ठेकेदारी करके औसतन 5 से 10 हजार रुपये प्रति माह कमाता था, जो लॉकडाउन के बाद ठहर गया है। हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में 15 लाख से भी अधिक परिवार हैं। इन 15 लाख परिवारों में से 2 लाख परिवार प्रवासी भाई बहनों के और 2 लाख और परिवार जो सरकारी नौकरी से जुड़े हैं, उनको निकाल दें तो 11 लाख परिवार ऐसे हैं जिनकी आमदनी लॉकडाउन के बाद लगभग खत्म हो चुकी है या बहुत कम हो चुकी है। इन 11 लाख परिवारों की मासिक आय 5000 रुपये के निम्न औसत से भी निकाले तो यह रकम 5.5 अरब रुपिया प्रतिमाह और 66.6 अरब रुपये प्रतिवर्ष होती है।यदि हम इस सबको मिलाए तो हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सालाना 86.5 अरब का घाटा ही रहा है। श्री पिरशाली ने कहा कि प्रदेश की त्रिवेंद्र रावत सरकार जो कोरोना को पलायन का समाधान मानती है ये बताये कि इन लोगों को उत्तराखण्ड में अपने घर व घर के आसपास रोजगार देने के लिये सरकार के पास क्या योजना है? उत्तराखण्ड की भाजपा सरकार के पास इस घाटे की क्षतिपूर्ति के लिये क्या उपाय हैं? क्या त्रिवेंद्र रावत सरकार 20 लाख करोड़ के हवा हवाई राहत पैकेज में से अगले 2 साल के लिए हमारे ग्रामीण क्षेत्रो के लिये 86.5 अरब रुपया दे सकती है? क्या सरकार इन प्रवासियों को बेरोजगारी भत्ता देगी? ——————————————————-
