“लेखक गाँव” में राज्यपाल का आगमन—प्रकृति की गोद में बसता एक ‘सपनों का साहित्यिक संसार’ देख भावुक हुईं आनंदीबेन पटेल

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देहरादून में भारत के पहले लेखक गाँव ने जीता दिल—राज्यपाल बोलीं: “अविश्वसनीय है यह कल्पना”


देहरादून से बड़ी खबर!
आज प्रकृति की हरियाली, पहाड़ों की शांति और साहित्य की सुगंध से महकते लेखक गाँव में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल खुद इस अनोखे साहित्यिक धाम को देखने पहुँचीं। जैसे ही उनका काफिला पहुँचा, पूरा परिसर सम्मान, उत्साह और गर्व से झिलमिला उठा।


🌿 “ऐसा भी हो सकता है… सोचा नहीं था!”

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल यहाँ की सुंदरता और अवधारणा से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने मंच से ही कहा—

“मुझे कल्पना नहीं थी कि प्रकृति की गोद में इतना सुंदर और अद्भुत लेखक गाँव बनाया जा सकता है—यह सच में अविश्वसनीय है।”

उनकी आवाज़ में आश्चर्य भी था और गर्व भी—जैसे किसी छुपे हुए खजाने का अचानक पता चल गया हो।


📚 साहित्य और संस्कृति का संगम

इस खास मौके पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और लेखक गाँव के संरक्षक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने राज्यपाल का स्वागत किया। उनके साथ कई बड़े नाम भी मौजूद रहे—मंत्री, साहित्यकार, पद्मश्री सम्मानित हस्तियाँ—सभी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।

फूलों की खुशबू और तालियों की गूंज के बीच हुआ यह स्वागत सिर्फ औपचारिक नहीं था—यह एक विचार, एक मिशन और एक सपने का सम्मान था।


📖 किताबों का आदान-प्रदान—भावनाओं का संवाद

कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया जब राज्यपाल ने अपनी पुस्तक “वो मुझे हमेशा याद रहेंगे” डॉ. निशंक को भेंट की। जवाब में डॉ. निशंक ने अपनी चर्चित कृति “हिमालय में राम” उन्हें सादर दी।

यह सिर्फ किताबों का आदान-प्रदान नहीं था—यह विचारों, अनुभवों और संस्कारों का मिलन था।


🌄 लेखक गाँव—सिर्फ जगह नहीं, एक एहसास

राज्यपाल ने पूरे परिसर का भ्रमण किया—हर कोना, हर दृश्य, हर गतिविधि को ध्यान से देखा। यहाँ की शांति, सृजनात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक माहौल ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।

उन्होंने कहा कि—

“लेखकों को जिस वातावरण की जरूरत होती है, वह यहाँ पूरी तरह मौजूद है।”


👥 गणमान्य लोगों की मौजूदगी ने बढ़ाई गरिमा

इस मौके पर कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे—साहित्यकार, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि—सभी ने इस पहल को सराहा और इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का नया अध्याय बताया।


💥 अंत में एक सवाल…

क्या लेखक गाँव सिर्फ एक प्रोजेक्ट है… या फिर यह आने वाले समय में भारत की सांस्कृतिक आत्मा का नया केंद्र बनने जा रहा है?

आज जो यहाँ हुआ, वह सिर्फ एक दौरा नहीं था—यह उस सोच की जीत थी, जो शब्दों से दुनिया बदलने का सपना देखती है।

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