हरदा के इस्तीफे का ऐलान: कांग्रेस में अंदरूनी दबाव की राजनीति या जन समर्थन की कमी?
देहरादून, 27 मई।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के चुनाव न लड़ने के ऐलान ने उत्तराखंड की सियासत में हलचल तो मचाई है, लेकिन बीजेपी इसे केवल ‘राजनीतिक दबाव बनाने का नाटक’ मान रही है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने हरदा के इस कदम को कांग्रेस के भीतर सहानुभूति बटोरने की चाल बताया है।
भट्ट ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “हरदा की राजनीतिक विश्वसनीयता अब शून्य हो चुकी है, और जनता ने उन्हें बार-बार नकारा है। अब उन्हें राजनीति से संन्यास लेने का समय है, न कि ड्रामा करने का।”
“हरदा के पास तो कांग्रेसियों को भी कांग्रेसी नहीं बना पाए” – भट्ट का तंज
भट्ट यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि जो नेता बीजेपी में शामिल होते हैं, वे पहले दिन से ही “पूरे भाजपाई” बन जाते हैं। परंतु हरीश रावत अपनी पार्टी के लोगों को भी कांग्रेस के विचार से जोड़ नहीं पाते।
भट्ट ने कटाक्ष करते हुए कहा, “अगर कोई कांग्रेस छोड़कर राष्ट्र निर्माण के लिए हमारे साथ आना चाहता है तो उसका हम स्वागत करते हैं। बीजेपी एक विचारधारा है, जहां आने वाला व्यक्ति खुद को उसका हिस्सा बना लेता है।”
पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटी बीजेपी
पंचायत चुनाव को लेकर महेंद्र भट्ट ने बताया कि पार्टी पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतरने को तैयार है। उन्होंने बताया कि हाल ही में जारी हुई वोटर लिस्ट की बारीकी से जांच पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा की जा रही है।
जल्द ही पर्यवेक्षक टीमों को ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा जाएगा ताकि चुनावी तैयारियों को और तेज किया जा सके। उन्होंने कहा, “पंचायत चुनाव भले ही पार्टी सिंबल पर न लड़े जाएं, लेकिन हम अपने समर्थित उम्मीदवारों के दम पर हर सीट पर जीत दर्ज करेंगे।”
राजनीतिक विश्लेषण:
एक तरफ जहां हरीश रावत के चुनाव न लड़ने का ऐलान सियासी गलियारों में सहानुभूति और सम्मान का विषय बन रहा है, वहीं बीजेपी इसे एक चालाकी भरा राजनीतिक स्टंट मान रही है।
अब देखना यह है कि हरदा अपने फैसले पर टिके रहते हैं या पार्टी की भीतरी राजनीति उन्हें मैदान में लौटने पर मजबूर करती है।
🖋️ लेखक: मेरु रैबार टीम
📍स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
📅 तारीख: 27 मई 2025
