मरने के बाद भी कतार में इंतजार? श्मशान में दाह संस्कार को लेकर लग रही लम्बी लाइन |
अमित कण्डियाल
जीते जी भागम भागम में लगे हुए इंसान को कोरोना महामारी ने मरने के बाद घाट पर भी कतार में लगा दिया है | अपनी कैपसिटी से अधिक दाह संस्कार के बाद भी शवो की तदाद दिन प्रति दिन बढती जा रही है और घाट छोटे पड़ते जा रहे है ऐसे में लोगो को अपने परिजनों के शव जलाने के लिए अगले दिन का इन्तजार करना पड़ रहा है | घाट संचालको की माने तो घाट पर लकडियो की भी कमी हो गयी है और कोई भी प्रशासनिक सहयोग नहीं मिल पा रहा है |
कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान यदि किसी की मृत्यु हो जाती है। तो उसके अंतिम संस्कार के लिए भी शमशान घाट पर एक दिन से भी अधिक इंतजार करना पड़ सकता हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि महानगरों की तरह अब तीर्थनगरी ऋषिकेश में भी अब यह मंजर देखा जा रहा है।
शहर में चंद्रेश्वरनगर स्थित श्मशान घाट पर प्रतिदिन 10 शवों को जलाने की ही व्यवस्था की गई है लेकिन वर्तमान समय की चुनौतियों को देखते हुए श्मशान घाट में शवों के दाह संस्कार के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। जिसके चलते कोरोना संक्रमित और सामान्य मृत्यु के 20 शवों का प्रतिदिन श्मशान घाट पर दाह संस्कार चल रहा हैं। ऐसी स्थिति में शवों की संख्या अधिक होने पर दाह संस्कार के लिए परिजनों को अगले दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है। श्मशान घाट की ऐसी स्थिति एक और जहां लोगों के भीतर भय का माहौल बना रही है। वहीं यह गम्भीर समस्या होने पर शहरवासियों के लिए चिंता का विषय भी बन गया है।
पंकज गुप्ता ( सेवक, मुक्तिधाम )
